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वन-डे और T-20 के बाद क्या अब खतरे में है आर अश्विन का टेस्ट करियर?

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आर अश्विन और विराट कोहली - फोटो : सोशल मीडिया
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एंटिगा टेस्ट के प्लेइंग 11 में आर अश्विन को जगह ना मिलना भारतीय क्रिकेट का इस वक्त का सबसे गर्मागर्म मुद्दा है। इस मुद्दे को गरमाने में पूर्व कप्तान और दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर का रोल सबसे अहम है। टेस्ट मैच के पहले दिन जब प्लेइंग 11 का एलान हुआ तब वही कॉमेंट्री कर रहे थे। आर अश्विन को प्लेइंग 11 से बाहर रखने के फैसले को उन्होंने ‘एस्टॉनिशिंग’ यानी बेहद हैरान करने वाला बताया।

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उन्होंने कहा कि जिस खिलाड़ी के वेस्टइंडीज के खिलाफ ऐसे बेहतरीन रिकॉर्ड्स हों उसका टीम में ना होना चौंकाने वाला है। इसके बाद मीडिया को ‘हेडलाइन’ मिल गई। हेडलाइन से इतर अब बड़ा सवाल ये है कि आर अश्विन का भारतीय क्रिकेट में भविष्य क्या है? आम तौर पर रवायत ये होती है कि अगर किसी सीनियर खिलाड़ी को टीम में जगह दी गई है तो उसे प्लेइंग 11 में भी मौका दिया जाता है।

रोहित शर्मा को इस कसौटी पर इसलिए नहीं परखा जाएगा क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में अभी उन्हें खुद को साबित करना है। इस बात को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर टीम इंडिया के ‘थिंकटैंक’ ने भारतीय स्पिन आक्रमण को आर अश्विन से आगे जाकर देखना शुरू कर दिया है तो उन्हें टीम में भी नहीं चुनना चाहिए था। क्योंकि उन्हें टीम में चुनकर प्लेइंग 11 से बाहर रखने का सीधा मतलब है कि वो अब टीम इंडिया के तीसरे स्पिनर हैं।

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स्पिनर को जीतना होता है कप्तान का भरोसा

आर अश्विन और विराट कोहली - फोटो : सोशल मीडिया
यूं तो प्लेइंग 11 के हर एक खिलाड़ी को कप्तान की उम्मीदों पर खरा उतरना होता है। लेकिन कप्तान का स्पिनर पर भरोसा सबसे अहम होता है। कुछ साल पहले का समय याद कीजिए। धोनी ने भज्जी को हटाकर आर अश्विन को टीम में जगह दी थी। आर अश्विन पर धोनी का भरोसा कमाल का था। अश्विन की कामयाबी का एक बड़ा ‘फैक्टर’ भी यही है। लेकिन जैसे ही विराट ने कप्तानी संभाली आर अश्विन की स्थिति धीरे धीरे कमजोर होती चली गई। थोड़ा और इतिहास में चलिए बतौर कप्तान सौरव गांगुली की पहली पसंद हरभजन सिंह हुआ करते थे। जबकि राहुल द्रविड़ जब आए तो उन्होंने अनिल कुंबले और मुरली कार्तिक जैसे गेंदबाजों को मौका दिया। अब मौजूदा टेस्ट मैच में आते हैं। वेस्टइंडीज की टीम में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। ऐसे में आर अश्विन की जगह और पक्की मानी जा रही थी। क्योंकि बाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए अंदर जो स्पिन करेगा उसे खेलने में बल्लेबाज को आसानी रहेगी। लेकिन विराट कोहली ने रवींद्र जडेजा को मौका दिया। इससे भी ये बात साबित होती है कि अब टेस्ट क्रिकेट में आर अश्विन का नंबर रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव के बाद आता है।
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फिर गावस्कर को हैरानी क्यों हुई

सुनील गावस्कर
गावस्कर की हैरानी की वजह है आर अश्विन के रिकॉर्ड्स। 2016 में जब भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज का दौरा किया था तो आर अश्विन प्लेयर ऑफ द सीरीज थे। उन्होंने 17 विकेट लेने के साथ साथ दो शतक भी लगाए थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ आर अश्विन के रिकॉर्ड्स वैसे भी काफी खास हैं। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में जो 4 शतक लगाए हैं सभी वेस्टइंडीज के खिलाफ ही हैं। करीब 33 साल के आर अश्विन ने 65 टेस्ट मैच में 342 विकेट लिए हैं। उम्र के लिहाज से जडेजा और कुलदीप यादव दोनों उनसे छोटे हैं। जडेजा करीब 30 साल के हैं। जबकि कुलदीप यादव 25 साल के। इन दोनों गेंदबाजों में विराट कोहली को भारतीय स्पिन आक्रमण का भविष्य दिखता है। कुछ रोज पहले टीम के हेड कोच रवि शास्त्री ने भी कहा था कि कुलदीप यादव टीम के लिए बेहतर विकल्प हैं। इसके बाद हरभजन सिंह ने भी हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके हिसाब से टेस्ट फॉर्मेट में कुलदीप यादव आर अश्विन से बेहतर विकल्प हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 
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