कांग्रेस ने हार की वजहों की समीक्षा करने की बात कही है।
- फोटो : social media
राज्य में पिछड़ापन, विकास और बेरोजगारी जैसे मुद्दे ही अहम रहे। बीजेपी के अलावा तमाम दलों ने अपने घोषणापत्र में विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) के खात्मे को प्रमुख मुद्दा बनाया था। लेकिन नतीजों से साफ है कि अफस्पा का मुद्दा इस बार भी असरदार साबित नहीं हुआ। उधर, बीजेपी ने कहा है कि अब सरकार के गठन के बाद पार्टी केंद्र से इस अधिनियम को हटाने का अनुरोध करेगी।
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह कहते हैं कि उनके पांच साल के शासनकाल के दौरान राज्य में शांति बहाल हुई और अब इसी बुनियाद पर अफस्पा को खत्म करने की मांग उठाई जा सकती है। बीजेपी ने अपने चुनाव अभियान के दौरान लगातार मणिपुर को नाकाबंदी मुक्त करने का दावा किया। पहले मणिपुर हर बात पर महीनों लंबी आर्थिक नाकेबंदी के लिए कुख्यात था।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने हार की वजहों की समीक्षा करने की बात कही है। राजनीतिक पंडितों का अनुमान था कि अगर पार्टी पिछले प्रदर्शन के आसपास रहती है तो वह एनपीपी के साथ मिलकर सरकार बना सकती है। लेकिन उसके खराब प्रदर्शन ने इस संभावना को खत्म कर दिया।
वैसे, आम लोगों में चुनावी मुद्दों के प्रति कोई खास उत्साह नहीं था। इस संवाददाता ने अपने एक सप्ताह मणिपुर प्रवास के दौरान जितने लोगों से बात की उन सबका कहना था कि सरकार में कोई भी आम लोगों के जीवन में कोई खास बदलाव नहीं आएगा। राजधानी इंफाल तक में पीने के पानी और सीवर का भारी संकट है। लेकिन नतीजों पर इसका कोई असर नहीं नजर आ रहा है। फाल में एकाध ओवरब्रिज ही है। नतीजतन ट्रैफिक जाम की भारी समस्या है।
राजनीतिक विश्लेषक पी. नाओबा कहते हैं, "एक मजबूत विपक्ष के अभाव और क्षेत्रीय दलों के बीच वोटों के विभाजन ने बीजेपी का फायदा पहुंचाया है। बीते पांच साल के दौरान बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके कारण उसकी सीटों में इजाफा होता। खुद पार्टी के नेताओं को भी इसका भरोसा नहीं था।"
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।