राज्य में विधानसभा की 294 सीटें हैं। विधान परिषद में सदस्यों की तादाद विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है।
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क्या है राज्य की स्थिति
राज्य में विधानसभा की 294 सीटें हैं। विधान परिषद में सदस्यों की तादाद विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है। ऐसे में इसलिए बंगाल में विधान परिषद में 98 सदस्य हो सकते हैं। विधानसभा ने प्रस्ताव जरूर पारित कर दिया है। लेकिन अब इसे राज्यसभा और लोकसभा में पारित कराना और राष्ट्रपति की मंजूरी लेना ममता के लिए कठिन चुनौती है।
वैसे, पश्चिम बंगाल देश के उन शुरुआती राज्यों में शामिल है जहां विधान परिषद का गठन किया गया था। लेकिन वर्ष 1969 में तत्कालीन राज्य सरकार ने एक प्रस्ताव पारित कर इसे खत्म कर दिया था।
दरअसल, 1967 में राज्य विधानसभा चुनाव कराए गए थे। उसमें कांग्रेस को पहली बार हार का सामना करना पड़ा था और 14 पार्टियों का गठबंधन यूनाइटेड फ्रंट यानी संयुक्त मोर्चा सत्ता में आया था। लेकिन महज आठ महीने बाद ही राज्यपाल धर्मवीर ने अजय मुखर्जी सरकार को बर्खास्त कर दिया।
उसके बाद निर्दलीय विधायक प्रफुल्ल चंद्र घोष कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बने। लेकिन उसके बाद दोनों सदनों में कई दिलचस्प घटनाएं देखने को मिलीं। विधानसभा में जहां अध्यक्ष ने राज्यपाल के कदम को असंवैधानिक करार दिया,वहीं कांग्रेस के बहुमत वाली विधान परिषद ने घोष सरकार के प्रति आस्था जताते हुए प्रस्ताव पारित कर दिया। हालांकि वह सरकार महज 90 दिन में ही गिर गई और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
वर्ष 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर संयुक्त मोर्चा सरकार ही सत्ता में आई। मोर्चा ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में विधान परिषद को खत्म करने की बात कही थी। संयुक्त मोर्चा सरकार ने विधान परिषद को खत्म करने का बिल विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत से पास करा लिया। राज्य विधानसभा में बिल पास होने के चार महीने बाद संसद के दोनों सदनों ने भी इसे हरी झंडी दिखा दी और उसके साथ ही राज्य में विधान परिषद का अस्तित्व खत्म हो गया।
पश्चिम बंगाल की राह कितनी मुश्किल है, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। असम विधानसभा ने वर्ष 2010 में और राजस्थान विधानसभा ने 2012 में राज्य में विधान परिषद बनाए जाने का बिल पास किया था। लेकिन इन दोनों राज्यों के विधेयक अभी भी राज्यसभा में लंबित हैं।
फिलहाल देश के छह राज्यों--बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में ऊपरी सदन या विधान परिषद है। इनमें से तीन राज्यों---उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विधान परिषद के सदस्य हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद बीजेपी और उसकी अगुवाई वाली केंद्र सरकार जिस तरह बंगाल से जुड़े तमाम मुद्दों को नाक का सवाल बनाती रही है, उसमें इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
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