मोरारजी देसाई भी चुनाव हारने के बावजूद मुख्यमंत्री बने
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जयललिता भी बिना चुनाव लड़े सीएम बन गईंं थीं।
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चुनाव हारने से जो नहीं बन सके मुख्यमंत्री
सन् 1996 में केरल में CPM के धुरन्धर नेता और मुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्तावित वी.एस. अचुथानन्दन मरारीकुलम सीट पर कांग्रेस के पी.जे. फ्रांसिस से विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसी तरह वर्ष 2014 के झारखण्ड विधानसभा चुनाव में भाजपा तो जीत गई मगर उसके मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे अर्जुन मुंडा चुनाव हार गए। वर्ष 2017 के हिमाचल विधानसभा के चुनाव में भी भाजपा को तो स्पष्ट बहुमत मिल गया मगर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में सबसे आगे चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री प्रो0 प्रेम कुमार धूमल स्वयं चुनाव हार गए। इसका लाभ वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मिला। उत्तराखण्ड में हुए पहले आम चुनाव में भले ही भाजपा को बहुमत नहीं मिला मगर उसके पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानन्द स्वामी देहरादून की लक्ष्मण चैक सीट पर चुनाव हार गये थे। उस चुनाव में रमेश पोखरियाल निशंक को भी हार का मुंह देखना पड़ा। निशंक 2009 में मुख्यमंत्री बन सके और वर्तमान में वह केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्री हैं।
राष्ट्रीय दल थोपते हैं विधायकों पर नेता
विधानसभा चुनाव जीतने से पहले ही विधायक दल का नेता चुने जाने पर राज्य की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्रियों की सूची तो बहुत ही लम्बी है। देश की राजनीति पर दशकों तक मजबूत पकड़ रखने वाली कांग्रेस ने विधान मण्डल दलों पर ऊपर से नेता थोपने का जो सिलसिला शुरू किया था वह भाजपा ने भी जारी रखा है। अब विधायक दल का नेता विधायकों द्वारा नहीं बल्कि केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा चुना जाता है और फिर उसे विधायक दल पर थोपा जाता है।
थोपे गए नेता स्वाभाविक नेता न होने के कारण राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता का एक कारण यह भी है। अकेले उत्तराखण्ड में 20 सालों में 10 मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। नारायण दत्त तिवारी के अलावा कोई अन्य मुख्यमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। ऊपर से नेता थोपे जाने पर या तो उनके लिए उपचुनाव कराना पड़ता है या फिर विधान परिषद के रास्ते उनकी विधान मण्डल में आसान एंट्री करानी होती है जैसा कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और उनके डिप्टी केशव प्रसाद मौर्य और देवेन्द्र शर्मा के लिए किया गया। लेकिन बंगाल में विधान परिषद 1969 में ही समाप्त हो गई थी इसलिए ममता को विधानसभा की ही कोई सुरक्षित सीट तलाशनी होगी।
बिना चुनाव जीते दुबारा नहीं बन सकते मुख्यमंत्री
संविधान के अनुच्छेद 164 (4) में 6 महीने के अन्दर किसी भी गैर विधायक मुख्यमंत्री या मंत्री को चुनाव जीतने की मोहलत तो है मगर ऐसा भी नहीं कि 6 महीने पूरे होने पर कोई मुख्यमंत्री पुनः शपथ लेकर बिना चुनाव जीते ही अगले 6 महीनों के लिये मुख्यमंत्री बन जाए। भ्रष्टाचार के आरोप में सजायाफ्ता होने पर तमिलनाडू में जयललिता के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लग गया था मगर वह बिना चुनाव लड़े ही मुख्यमंत्री बन गई थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय का फैसला था कि कोई व्यक्ति 6 महीने से अधिक बिना चुनाव जीते मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं रह सकता। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला आतंकवादियों द्वारा मारे गए पंजाब के मुख्यमंत्री बेअन्तसिंह के बेटे तेजप्रकाश सिंह को को दंबारा मंत्री बनाने के लिए मांगी गई अनुमति के संबंध में आया था।
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