जीत का निशान दिखातीं ममता बनर्जी
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भाजपा की हार की वजहें
भाजपा को हतोत्साहित करने वाली सबसे बड़ा फैक्टर यह है कि उसे उतनी भी सीटों पर भी विजयश्री नहीं मिल सकी जितनी विधानससभा सीटों पर उसे 2019 के लोकसभा चुनाव में बढ़त मिली थी। कहना न होगा कि इस चुनाव को भाजपा ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। चुनाव जीतने के लिए दुनिया की इस सबसे बड़ी पार्टी ने कोई कोर-कसर बाक़ी नहीं छोड़ी, लेकिन उसके नेताओं के अति आत्मविश्वास ने पार्टी का बड़ा नुकसान किया।
बेशक राष्ट्रवाद में भरोसा भाजपा एक देशभक्त राजनीतिक दल है। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले 370 और 35 ए जैसे अनुच्छेदों को हटाकर भाजपा ने साबित कर दिया था कि वह राष्ट्र के व्यपाक हित में चिंतन करने वाली पार्टी है। लेकिन देशभक्त तो हर राजनीतिक दल है। राजनीतिक दल को चुनाव जीतने के लिए जनोन्मुख भी होना चाहिए। जनता के दुख-दर्द का शिद्दत से महसूस करना चाहिए। राजनीतिक दल को जनता का हितैषी ही नहीं होना चाहिए बल्कि बिना विज्ञापन के दिखना चाहिए कि सरकार जनता की हितैषी है। इस फ्रंट पर भाजपा और उसकी केंद्र सरकार चूक गई।
पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मुद्दे ने भी अहम किरदार निभाया। भारत ने कोरोना संक्रमण पर अपनी विजय का ऐलान बहुत जल्दी कर दिया, जैसा कि अमेरिका के शीर्ष महामारी विशेषज्ञ एंथनी फाउची मानते हैं। भारत में कोरोना वायरस के बहुत तेजी से बढ़ते संक्रमण पर रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना फाउची ने कहा कि भारत ने कोरोना के संक्रमण की गंभीरता को समझे बिना इस वैश्कि वायरस को हराने का एलान कर दिया।
कोरोना वायरस को भूलेे
एक गंभीर सवाल यह भी है कि भारत ने कोरोना वायरस की पहली लहर से कोई सबक नहीं लिया। सरकार और सरकार में बैठे लोग लोगों को ग़ुमराह करते रहे। यही वजह है कि अब कोरोना वायरस साक्षात् यमराज बन गया है। देश में हर जगह ऑक्सीजन की जो भारी कमी देखने को मिल रही है, उसके लिए एक बड़ा तबका केंद्र सरकार को जिम्मेदार मान रहा है।
भाजपा से सहानुभूति रखने वाले राजनीतिक पंडित इस साल के आरंभ में मानने लगे थे कि पश्चिम बंगाल के विधान सभा चुनाव में बारी जीत दर्ज करके भाजपा वहां सत्ता में आ सकती है। भाजपा इसके लिए एड़ी-चोटी का जोर भी लगा रही थी। पिछले साल के अंत में और इस साल के शुरुआत में जब एक एक करके त्रिणमूल कांग्रेस के ढेर सारे भाजपा का दामन तामने लगे थे, तो बंगाल के बाहर रहने वालों को भी एक बार लगा कि मुमकिन है भाजपा पश्चिम बंगाल में ममता को भी सत्ता से बेदखल कर दे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ममता बनर्जी इस राज्य में लगातार तीसरी बार विजयश्री दर्ज कर रही हैं और शुरुआती रुझान में उनके दल को दो सौ से अधिक सीट मिलती दिख रही है। दूसरी ओर बंगाल में दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने कारसपना देखने वाली भारतीय जनता पार्टी की सीट तीन अंकों में नहीं पहुंचती दिख रही है।
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