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फॉलोऑन को लेकर विराट कोहली के 'मास्टरस्ट्रोक' को समझिए

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टीम इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया
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साल 2001 की बात है। ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत के दौरे पर थी। कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 445 रन बनाए। इसके जवाब में भारतीय टीम पहली पारी में 171 रनों पर ही सिमट गई। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फॉलोऑन दिया। फॉलोऑन खेलने उतरी भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया।

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फॉलोऑन खेलते हुए भारतीय टीम ने 657 रन बना दिए। इसमें वीवीएस लक्ष्मण की एतिहासक 281 रनों की पारी शामिल है। इसी पारी में राहुल द्रविड़ ने शानदार 180 रन बनाए थे। राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण का करियर लंबा चला लेकिन इस एक पारी को उनके करियर की सबसे महान पारी माना गया। खैर, ऑस्ट्रेलिया को चौथी पारी में 384 रनों का लक्ष्य मिला। चौथी पारी में कंगारुओं पर हरभजन सिंह कहर बनकर टूटे। उन्होंने 6 विकेट चटकाए। इसी मैच की पहली पारी में हरभजन सिंह ने हैट्रिक समेत 7 विकेट लिए थे।

ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 212 रनों पर सिमट गई और भारत ने वो मैच 171 रनों से जीत लिया। ये मैच भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हो गया। तमाम नए रिकॉर्ड्स बन गए। इस टेस्ट मैच की कहानी आज इसलिए प्रासंगिक है इस टेस्ट मैच के बाद विश्व क्रिकेट में बहुत बड़ा बदलाव आया। बड़ी से बड़ी टीम ने पहली पारी में अच्छी खासी बढ़त होने के बाद भी दूसरी टीम को फॉलोऑन नहीं दिया। पुणे में विराट कोहली ने आखिर ये 'रिस्क' लिया जो कामयाब साबित हुआ।
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विराट कोहली के पास पहली पारी के आधार पर करीब सवा तीन सौ रनों की बढ़त थी और उन्हें अपने गेंदबाजों पर भरोसा था कि किसी भी सूरत में उन्हें अपने बल्लेबाजों को दोबारा बल्लेबाजी के लिए उतरने को नहीं कहना पड़ेगा। भारतीय गेंदबाजों ने उनके इस विश्वास को कायम रखा। दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम दूसरी पारी में 189 रनों पर सिमट गई और भारत ने लगातार दूसरा टेस्ट मैच एक पारी और 137 रनों से जीत लिया।

फॉलोऑन लेने से क्यों घबराती हैं टीमें   

टीम इंडिया - फोटो : social media
2001 के जिस मैच की कहानी हमने आपको याद दिलाई उसका टेस्ट क्रिकेट में यही महत्व है। उस टेस्ट मैच के बाद फॉलोऑन देने वाले मैच गिनती के होंगे। खुद विराट कोहली ने बतौर कप्तान अपने टेस्ट करियर में पुणे टेस्ट से पहले सिर्फ 6 टेस्ट मैचों में फॉलोऑन दिया है। जिन 6 टेस्ट मैचों में विराट ने फॉलोऑन दिया उसमें सिर्फ एक बार उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन दिया। वरना उन्होंने श्रीलंका, वेस्टइंडीज और बांग्लादेश जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीमों के खिलाफ फॉलोऑन दिया था।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी इसी साल जब उन्होंने फॉलोऑन दिया था तो उस मैच का ड्रॉ होना तय था। फॉलोऑन से टीमों के बचने की बात को ऐसे भी समझा जा सकता है कि भारत ने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहली बार दक्षिण अफ्रीका की टीम को फॉलोऑन दिया। दस साल में ये पहला मैच है जब दक्षिण अफ्रीका की टीम को दुनिया की किसी भी टीम ने फॉलोऑन दिया हो। पिछली बार 2008 में इंग्लैंड की टीम ने दक्षिण अफ्रीका को फॉलोऑन दिया था।  
 
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फॉलोऑन देने के बाद विराट का रिकॉर्ड

टीम इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया
फॉलोऑन देने के मामले में विराट कोहली बहुत सोच समझकर फैसला लेते हैं। बतौर कप्तान अपने टेस्ट करियर में उन्हें 14 मौके मिले जब वो विरोधी टीम को फॉलोऑन दे सकते थे। इसमें से सात बार उन्होंने फॉलोऑन दिया। इन 7 मैचों में से 5 में उन्हें जीत मिली। जबकि फॉलोऑन देने के बाद 2 मैच ड्रॉ हो गए। इसमें से एक मैच ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में था। दरअसल फॉलोऑन देने का मतलब है कि अगर विरोधी टीम ने फॉलोऑन से कुछ ज्यादा रन बना लिए तो फॉलोऑन देने वाली टीम को बल्लेबाजी के लिए उतरना पड़ेगा।

दुनिया की बड़ी से बड़ी टीम टेस्ट मैच की चौथी पारी में बल्लेबाजी करने से कतराती है। चौथे पारी के दबाव में बल्लेबाजी करना किसी भी बल्लेबाज के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में वो टीम जिसका पहली पारी में पलड़ा भारी था वो बेकार में दबाव में आ सकती है। विराट इसी फैसले को समझबूझ कर लेते हैं।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अब तक वो इस बात का आंकलन कर चुके हैं कि डीन एल्गर, कप्तान फाफ ड्यूप्लेसी और क्विंटन डी कॉक को छोड़कर बाकि खिलाड़ी रंग में नहीं हैं। इससे उलट भारतीय गेंदबाजों ने जरूरत के हर मौके पर विकेट निकाल कर दिया है। साथ ही मैच के तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद विराट के गेंदबाजों को पूरी रात आराम करने का मौका मिला। लिहाजा विराट मैच के चौथे दिन फॉलोऑन का फैसला लेकर मैदान में उतरे। विराट के इसी मास्टरस्ट्रोक ने उन्हें बड़ी कामयाबी दिलाई। 
 
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