मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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मसलन महाराष्ट्र में भी हाईकोर्ट के निर्णय के बाद तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार ने राज्य में पूर्व मुख्य सचिव जयंत कुमार बांठिया की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया। आयोग ने राज्य की मतदाता सूची को आधार बनाते हुए प्रयोग सिद्ध डाटा तैयार कर कोर्ट में प्रस्तुत किया, जिसको मान्य करते हुए प्रदेश में नगरीय निकायों में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण मंजूर किया गया।
मप्र में शिवराज सरकार ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के माध्यम से ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाई और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को स्वीकृति दी। बिहार में अति पिछड़ा वर्ग आयोग के जरिए ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाई गई और झारखंड सरकार ने कहा है कि वो ट्रिपल टेस्ट फार्मूला लागू होने के बाद ही नगरीय निकायों के चुनाव करवाएगी।
लोकसभा चुनाव की हो रही है तैयारी
सवाल यह भी है कि आखिर योगी सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर इतनी जल्दबाजी में क्यों है? इसका कारण असल में 2024 के लोकसभा चुनाव हैं। दिल्ली के तख्त पर तीसरी बार काबिज होने के लिए भाजपा इस राज्य से अधिकाधिक सीटें जीतना चाहती है, जो पिछड़ा वर्ग के भरपूर समर्थन के बगैर संभव नहीं है।
राज्य में यूपी सामाजिक न्याय रिपोर्ट 2001 के मुताबिक ओबीसी आबादी कुल का लगभग 54 फीसदी यानी आधे से ज्यादा है, जबकि यूपी पिछड़ा वर्ग आयोग ने 79 जातियों को ओबीसी में शामिल किया है। सीएसडीएस सर्वे के मुताबिक ओबीसी में भी सर्वाधिक 19.4 फीसदी जनसंख्या यादवों की है।
यादव बनाम गैर यादव का दांव
दूसरे नंबर पर कुर्मी हैं। 2014 के बाद से बीजेपी ने ओबीसी में यादव बनाम गैर यादव दांव सफलता से चला है। हालांकि भाजपा और सपा दोनों ही अति पिछड़ी जातियों को जोड़ने में लगे हैं। लेकिन हाईकोर्ट ने फैसले ने इस प्रक्रिया को भी झटका दे दिया है। योगी सरकार इस मामले में दो पाटों में फंसी है। अगर वह ट्रिपल फार्मूले को लागू कर चुनाव कराती है तो उस पर चुनाव टालने का आरोप लगेगा। अगर वह बिना ओबीसी आरक्षण चुनाव कराती है तो पिछड़ा वर्ग विरोधी होने का आरोप तो लगने ही लगा है।
वैसे भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं अगड़ी जाति से आते हैं। हालांकि भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ेगी, जो खुद ओबीसी से आते हैं, लेकिन यूपी में अगर ओबीसी जातियां भाजपा से खफा हुईं तो चुनाव नतीजों पर असर पड़े बिना नहीं रहेगा, भाजपा की सबसे बड़ी परेशानी भी यही है।
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