हो सकता है कि आपने अंडर 19 विश्वकप के ज्यादातर मैच नहीं देखे हों। मैंने भी नहीं देखे थे। हां अमर उजाला में पढ़कर यह जरूर पता चलता रहा कि भारत अपने मैच लगातार जीत रहा है। क्रिकेटर सरफराज के छोटे भाई मुशीर खान के कारण भी सोशल मीडिया पर थोड़ी चर्चा मिल रही थी। इसीलिए सोचा कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल मैच जरूर देखा जाए।
इत्तेफाक देखिए कि टीवी के सॉफ्टवेयर में कुछ कमी आने के कारण दक्षिण अफ्रीका की पहले खेली गई पारी नहीं देख पाया। इसके बाद तय किया कि मोबाइल पर टीवी चलाकर या ऑनलाइन स्कोरिंग वेबसाइटों के सहारे मैच को देखा जाएगा। भारत की पारी शुरू होने वाली थी और देखा कि दक्षिण अफ्रीका ने 245 का लक्ष्य दिया है। उसी वेबसाइट पर यह भी देखा कि इस मैदान में इससे पहले इतना स्कोर केवल एक ही बार पार किया जा सका है।
खैर लगा कि भारत की टीम तो मजबूत है तो स्कोर छोटा ही रहेगा। पर यह क्या हुआ, पहली गेंद ही पर ही भारत का पहला विकेट गिर गया। फिर मुशीर खान मैच जिता देंगे लेकिन एक अच्छा चौका मारने के बाद मुशीर भी चले गए। इसके बाद बीच-बीच में मैच देखता रहा। जब 32 पर चौथा विकेट गिरा तो मानो दिल ही टूट गया। वेबसाइट को बंद कर दिया, थोड़ी देर बाद देखा तो स्कोर 90 पर चार विकेट ही था। दुआ करते हुए फिर बंद कर दिया लेकिन फिर देखा तो 134 बन गए थे और विकेट केवल चार ही थे।
इसके बाद मैच टीवी पर देखना शुरू किया। अंदाजा हुआ कि ये खिलाड़ी उम्र में बेशक अभी कम हैं लेकिन हौसला बड़ा है। उदय सहारन की टिकाऊ कप्तानी पारी देखकर आप हैरान रह जाएंगे, वहीं एक और युवा सचिन धास जैसे दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों को बख्शना नहीं चाहता था। शतक पूरा नहीं हुआ लेकिन भारत को सुरक्षित जीत की ओर ले जाकर इस खिलाड़ी ने जता दिया कि वह भी अपने हमनाम खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर की तरह एक दिन बड़े मैच जिताऊ खिलाड़ी साबित हो सकते हैं।
महाराष्ट्र के इस खिलाड़ी के बारे में जानकारी करेंगे तो खास बात यह भी पता चलेगी कि उनके पिता ने सचिन तेंदुलकर के नाम पर ही उनका नाम सचिन रखा। 95 गेंद पर 96 रन की पारी खेली सचिन ने। कप्तान सहारन ने तो जैसे तय ही कर रखा था कि वह फाइनल में पहुंचा कर ही दम लेंगे। अंतिम क्षणों तक लगा कि मैच हाथ से जा सकता है लेकिन उदय सहारन ने 123 गेंद पर 81 रन बनाए।
टीवी पर इस मैच की हिंदी की कमेंटरी उन्मुक्त चंद कर रहे थे। वह युवा खिलाड़ी जिनकी कप्तानी में भारत यह खिताब जीत चुका है। यह बात और है कि वक्त के साथ मिली शोहरत के साथ उन्मुक्त उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए और अभी अमेरिका में लीग खेल रहे हैं। दुआ करिए कि इस बार खेल रही युवा पीढ़ी हमें यह खिताब तो दिलाए ही और आगे भी विश्व चैंपियन बनाए। और हां फाइनल जरूर देखिएगा और इन खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानियां भी जानिएं।