दीवार पर कई कंप्यूटर स्क्रीन लगी हैं। स्क्रीन पर लाल हरे रंगों में कुछ लाइनें उछलकूद कर रही हैं। करीब से देखने पर पता चलता है कि यहां संख्याएं धमाचौकड़ी मचा रही थीं। तरह तरह पैटर्न बन-बिगड़ रहे हैं। ग्राफ की लाइनों से स्क्रीन पर पर्वत-घाटियां बन रही हैं। ऐसी स्क्रीन के सामने खड़ा होता था, शेयर बाजार का स्वघोषित ‘बाप ऑफ चार्ट’ यानी नसीरुद्दीन अंसारी। शेयर बाजार का यह नजूमी इसी चार्ट विद्या के सहारे सोशल नेटवर्क पर हजारों लोगों को शेयर खरीदने-बेचने-सौदे करने की सलाह देता था। बीते महीने सेबी ने चार्ट के पिताजी को 17 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। निरा फ्रॉड साबित हुआ यह ज्योतिषी।
टेक्निकल एनालिसिस या चार्ट की तकनीक शेयर बाजार, कमॉडिटी, विदेशी मुद्रा सौदों का ज्योतिष शास्त्र है। इनकी गणनाओं पर सेकंडों में करोड़ों इधर से उधर हो जाते हैं। कहते हैं कि इस विद्या के महारथी वक्त से पहले शेयरों, तेल, तांबा, स्टील, गेहूं आदि की कीमत भांप लेते हैं। सबसे पहले कमा लेते हैं या नुकसान बचा लेते हैं। किस्से तो यह भी हैं कि इस शास्त्र के जानकारों को मंदी की संभावना भी आंकना आता है। बीते कुछ वर्ष से इस इस चार्ट विद्या के माहिरों की बन आई है। कई तोता ज्योतिषी तो मोबाइल एप पर टेक्निकल चार्ट पढ़ाकर लोगों से आप्शन ट्रेडिंग करा रहे हैं। बाप ऑफ चार्ट भी यही करता था। मगर यह रोमांचक विद्या 17वीं सदी के जिस कवि या दार्शनिक की देन मानी जाती है, उसने एलानिया तौर पर लिखा था कि लोगों को शेयर खरीदने बेचने की सलाह नहीं देनी चाहिए, क्योंकि बाजार के किसी घटनाक्रम को समझने की हमारी क्षमता बहुत सीमित है। ऐसे में एक शानदार सलाह पर किया गया सौदा भी तबाह कर सकता था।
कौन था यह कवि दार्शनिक? टेक्निकल एनालिसिस के पितामह यूरोप में पैदा हुए थे या जापान में? आइये संभालिए अपनी सीट टाइम मशीन में, अब हम उड़ान भर रहे हैं।
कहते हैं कि ग्रीक बाजारों में असीरियन कारोबारी सामान की कीमतों का पुराना हिसाब रखते थे, जो आने वाले वक्त किसी सामान की कीमत में बढ़ोतरी या कमी का पैटर्न समझने में मदद करता था। यानी कि अगर खराब मौसम में पहले कीमतें बढ़ी थीं, तो फिर मौसम बिगड़ने पर ऐसा ही होगा। ज्यादा पीछे न जाते हुए, हम चलते हैं एम्सटर्डम, 17 वीं सदी की शुरुआत में।
डच ईस्ट इंडिया कंपनी बन चुकी थी। इसके शेयरों की ट्रेडिंग के लिए दुनिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज एम्सटर्डम में काम करने लगा था। डच ईस्ट इंडिया कंपनी 1602 में भारत से कारोबार के लिए बनी थी। टाइम मशीन के साथ इस यात्रा पर हम फिर कभी चलेंगे।
अभी मिलिये जोसेफ डे ला वेगा से, जो मूलत: अर्जेंटीना के निवासी थे लेकिन छोटी उम्र में एम्सटर्डम आ गए थे। जोसेफ हीरे के व्यापारी थे, दार्शनिक थे और कविता भी लिखते थे।
साल 1688 में उन्होंने एक किताब लिखी। नाम है कन्फ्यूजन ऑफ कन्फ्यूजंस। गजब की किताब है यह। वेगा की यह रचना दुनिया की पहली स्टॉक इन्वेस्टमेंट गाइड है। वेगा जिस वक्त यह किताब लिख रहे थे, तब एम्सटर्डम वित्तीय जगत शेयर क्रांति से तप रहा था। डच ईस्ट इंडिया कंपनी के शेयरों में थोक में सौदे हो रहे थे। सट्टेबाजी हो रही थी। कारोबारी तरह-तरह की भविष्यवाणियां करते थे।
जोसेफ डे ला वेगा ने कन्फ्यूजन ऑफ कन्फ्यूजंस में बताया कि किस तरह पुरानी कीमतों के पैटर्न के आधार पर भविष्य का आकलन हो सकता है। यह टेक्निकल एनालिसिस का न्यूटन मूमेंट था। ‘कन्फ्यूजन ऑफ कन्फ्यूजंस’ को वित्तीय बाजारों में बिहैवियर इकनॉमिक्स का उपनिषद भी माना जाता है।
टाइम मशीन अब जापान की तरफ चलती है।
यह जापान का इडो युग था। तोकुगावा लेयासू के शासन में जापान की राजनीति स्थिर थी। वह आर्थिक प्रगति का दौर था। यह बात 1710 की है। चावल के बाजार में फ्यूचर्स सौदे शुरू हो गए थे। कीमतों को वक्त से पहले भांपने की जरूरत बढ़ रही थी। होम्मा मुनेशिया जापान के उत्तर-पश्चिमी तटीय शहर सकाता में चावल का धंधा करते थे। मुनेशिया ने कीमतों का एक कैंडलस्टिक पैटर्न विकसित किया और खूब पैसा कमाया। बाद में अन्य व्यापारी भी इसी कैंडल पैटर्न का प्रयोग करने लगे।
होम्मा मुनेशिया ने 1755 में किताब लिखी थी- द फाउंटेन ऑफ गोल्ड- द थ्री मंकी रिकॉर्ड ऑफ मनी। मुनेशिया चावल बाजार के वारेन बफे थे। तत्कालीन सम्राट ने उन्हें अपना वित्तीय सलाहकार बनाया। होम्मा को समुराई की मानद उपाधि भी मिली थी। जापान में आज भी कैंडलस्टिक चार्ट को सकाता चार्ट कहा जाता है।
जापान आए हैं, तो चीन को तरफ भी झांक लेते हैं। यहां कंन्फ्यूशियस के नियमों की रोशनी बाजार के आकलन की तकनीक बन रही थी। कन्फ्यूशियस ने कहा था कि कोई वस्तु 100 दिन से ज्यादा महंगी या सस्ती नहीं रहती। चीन के कारोबारियों के लिए यह टेक्निकल एनालिसिस का पहला अध्याय था।
अमेरिकी चार्ट का आर्ट चार्ल्स डाउ से शुरु होता है। वह डाउ जोंस एंड कंपनी के संस्थापक थे। उन्होंने अमेरिका के शेयर बाजार में सूचीबद्ध उद्योग और परिवहन शेयरों की कीमतों का अध्ययन किया। डाउ ने 1896 के बाद हुए हर बदलाव को परखकर डाउ थ्योरी पेश की, जो शेयर कीमतों में बढ़त और कमी का सिद्धांत बताती है। चार्ल्स डाउ और उनके शोध से अमेरिका के प्रतिनिधि शेयर सूचकांक डाउ जोंस का नजदीकी रिश्ता है।
डाउ के जीवित रहने तक अध्ययन प्रकाशित नहीं हुआ। वाल स्ट्रीट जनरल के संपादक विलियम हैमिल्टन ने 1920 में इसे प्रकाशित किया और चार्ट शेयर बाजार गणनाओं का हिस्सा बन गए।
टेक्निकल एनालिसिस की कला निकारागुआ के चीफ अकाउंटेंट राल्फ नेल्सन इलियट की भी कर्जदार है। अमेरिकी सरकार ने इलियट को निकारागुआ का अकाउंट संभालने भेजा था। मध्य अमेरिका की आबोहवा में वह गंभीर रुप से बीमार हो गए। अमेरिका लौट कर उन्होंने खुद को शेयर कीमतों के विश्लेषण में लगा दिया। इलियट ने करीब 75 साल के स्टॉक मूवमेंट का दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, सालाना विश्लेषण किया। आंकड़ों का यह पूरा हिसाब-किताब उन्होंने हाथ से बनाया था। इसके आधार पर उन्होंने प्रस्तुत की ‘इलियट वेव थ्योरी’। यह थ्योरी 1935 में उनकी किताब ‘द इलियट प्रिंसपल’ में प्रकाशित हुई थी। इलियट थ्योरी ने पहली बार बताया कि शेयरों के उतार- चढ़ाव में निवेशकों और व्यापारियों का मनोविज्ञान बड़ी भूमिका निभाता है।
राल्फ नेल्सन इलियट 1948 में दुनिया छोड़ गए। कहते हैं कि 1970 में मेरिल लिंच के एक युवा एनालिस्ट रॉबर्ट प्रेचर ने इलियट के काम को फिर लोगों के सामने पेश किया।
तो डच ईस्ट इंडिया कंपनी की ट्रेडिंग से लेकर गूगल या रिलांयस की ट्रेडिंग तक शेयर कमॉडिटी बाजारों में तकनीकें बदली हैं। मगर बाजार का मिजाज आज भी उतना ही अप्रत्याशित है, जितना कि जोसेफ डे वेगा के वक्त था। वेगा ने अपनी किताब में लिखा था-
‘शेयरों का रहस्यमय कारोबार दुनिया का सबसे पारदर्शी और सबसे धोखेबाज कारोबार है। यह धंधा सबसे सम्मानित भी है और कुख्यात भी। शानदार भी, विकृत भी। यह ज्ञान विश्लेषण का शिखर भी है और फर्जीवाड़े का गर्त भी। यह सूझबूझ का चमत्कार भी है और दुष्टता का केंद्र भी। यहां कामयाबी भी मिलती है और तबाही भी।’
तभी तो यहां बाप आफ चार्ट जैसे भी खूब मिल जाते हैं, जिसने अपने तीन करोड़ रुपये बाजार में गंवा दिए, मगर लोगों को चार्ट पढ़कर हफ्तों में करोड़पति बनाने का मंत्र दे रहा था।
टाइम मशीन की यात्रा का डिपो आ गया है।
जल्द मिलते हैं एक नए सफर पर।