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शिक्षक दिवस 2020: समाज और राष्ट्र के नीति-निर्माता हैं शिक्षक

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शिक्षक छात्रों के जीवन को सर्द-गर्म थपेड़ों से सुरक्षित करने वाला शिल्पकार भी है। - फोटो : social media
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कुदरत की कायनात में अहम किरदार है, मानव। मानव के भीतर नैतिकता, निःस्वार्थता और प्रतिबद्धता का अध्याय जोड़ता है, शिक्षक। शिक्षक केवल शब्दों का ज्ञान नहीं देता, वह छात्रों के जीवन को सर्द-गर्म थपेड़ों से सुरक्षित करने वाला शिल्पकार भी है। निश्चित तौर पर राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे अहम होती है।

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5 सितंबर सन् 1888 में तमिलनाडु में जन्में, भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, महान दार्शनिक एवं शिक्षाविद थे। जीवन के 40 बरस अध्ययन- अध्यापन को देने के बाद भी उनका छात्रों से लगाव कभी कम नहीं हो सका। डॉ. राधाकृष्णन की इच्छा थी, कि भारत के छात्रों के द्वारा उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में याद किया जाए। 

लिहाजा सन् 1962 से 5 सितंबर का दिन भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 5 सितंबर का दिन डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के साथ-साथ उन तमाम शिक्षकों के सम्मान का दिन भी होता है, जिन्होंने अपना जीवन छात्रों को समर्पित कर दिया है। 
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सदियों से भारतीय परंपरा में गुरु और गोविंद में, गुरु का स्थान ही श्रेष्ठ रहा है। जिसने गोविंद से पहचान कराई, वह गुरु ही है। इतिहास के महानतम गुरु के तौर में दर्ज आचार्य चाणक्य का नाम आज भी प्रासंगिक है। जिन्होंने एक साधारण से बालक को महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य बनाया और उनके शिष्य ने अपने गुरु का अखंड भारत का सपना साकार किया। 

यदि आचार्य चाणक्य नहीं होते, तो भारत को चंद्रगुप्त मौर्य जैसा पराक्रमी सम्राट न मिलता। यदि गोपाल कृष्ण गोखले न होते, तो विश्व महात्मा गांधी के विचारों से कैसे प्रेरणा लेता? भारत सहित विश्व में ऐसे कितने उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें लोगों की कामयाबी की वजह उनके शिक्षक ही हैं।

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वर्तमान समय में कोरोना महामारी से दुनिया बेहाल है, ऐसे में भी भारत के महान शिल्पकार...

भारत में भी शिक्षक अपना शत प्रतिशत दे रहे हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
अभी हाल ही में आई फिल्म 'सुपर थर्टी' के मुख्य किरदार 'आनंद कुमार' एक शिक्षक ही तो हैं। जो पिछले कई वर्षों से लगातार निःस्वार्थ भाव से, हर साल 30 गरीब छात्रों को आई आई टी की परीक्षा के लिए तैयार करते हैं। साथ ही उनका मार्गदर्शन भी करते हैं, ताकि उन बच्चों के जीवन से अंधेरा मिटाया जा सके और उन्हें रोशनी की ऐसी मशाल थमा दी जाए, जिससे पूरी दुनिया रोशन हो उठे। 

उनकी यह मानव सेवा बदस्तूर जारी है। आज उनके पढ़ाए बच्चे दुनिया की टॉप कंपनियों की कमान संभाले हुए हैं। भारत के इन बेमिसाल शिक्षकों को दुनिया सलाम करती है, जिन्होंने भारत को मजबूत राष्ट्र बनाने में अपना अहम योगदान दिया है, और लगातार दे रहे हैं।



वर्तमान समय में कोरोना महामारी से दुनिया बेहाल है, ऐसे में भी भारत के महान शिल्पकार अपने ज्ञान से छात्रों की जिंदगियां रोशन करने में लगे हैं। दुनियाभर के देशों में ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। भारत में भी शिक्षक अपना शत प्रतिशत दे रहे हैं। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई परंपरागत तरीके से दी जाने वाली शिक्षा से बिल्कुल अलग है, इसमे कई तरह की परेशानी भी हैं, कहीं बिजली नहीं है, तो कहीं

मोबाइल में नेटवर्क नहीं है, तो कहीं बच्चों के पास मोबाइल ही नहीं है।  ऐसे में शिक्षा देना, शिक्षक के लिए बहुत कठिनाई भरा है। एनसीईआरटी के एक सर्वे के मुताबिक, जो लगभग  34000 से ज्यादा लोगों पर किया गया था।

देश के 27 प्रतिशत लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं है। लगभग 28 प्रतिशत लोगों के पास बिजली की पहुंच न होने के कारण, ऑनलाइन क्लास संभव नहीं हो पा रही है। 

ऐसे में देश के लिए उदाहरण बन रहा है, हरियाणा का 'नूह' जिला जहां 'शिक्षा दूतों' के माध्यम से ऑफलाइन मोहल्ला पाठशाला लगाई जा रही है और बच्चों में सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए शिक्षा दी जा रही है। निश्चित तौर पर इन शिक्षकों की सेवा न देश भूलेगा और न ही देश के विद्यार्थी। जो वैश्विक महामारी के इस दौर में भी राष्ट्र के निर्माण में अपना अहम योगदान देने में लगे हुए हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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