दरअसल, न्यूजीलैंड के हर मैदानों के बाहर आपको सोढ़ी के बड़े-बड़े पोस्टर दिखेंगे और वो भी इसलिए ताकि यहां के भारतीय और एशियाई लोगों को क्रिकेट से और जोड़ा जा सके। न्यूजीलैंड क्रिकेट के मीडिया अधिकारी बेन मैकी ने मुझे बताया कि स्कूल और कॉलेज क्रिकेट में एशियाई मूल के खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। फिलहाल, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में मार्क चैपमैन, जीत रावल और भारत पोपली भी सोढ़ी और पटेल के अलावा बेहद लोकप्रिय एशियाई मूल के खिलाड़ी है। इन सबके अलावा आंध्र प्रदेश के तरुण नथुला, रॉनी हीरा (इनका जन्म ऑकलैंड में हुआ था), और आदित्य अशोक जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में न्यूजीलैंड के लिए खेल चुके हैं। वैसे जब भी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की बात आती है हर किसी के जेहन में ऑप स्पिनर दीपक पटेल का नाम ताजा हो जता है। पटेल ने 1992 वर्ल्ड कप में नई गेंद से पारी शुरु करने का क्रांतिकारी कदम उठाया था। आधिकारिक तौर पर कई खिलाड़ियों ने ये बात तो नहीं कही, लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना ये ह कि वो दिन दूर नहीं जब इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन की तरह भविष्य में भारतीय मूल का ही कोई खिलाड़ी इस देश की कप्तानी करता नजर आए। हो सकता है अगली बार टीम इंडिया जब न्यूजीलैंड के दौरे पर जाए तो सिक्के की उछाल के लिए स्थानीय कीवी की बजाए आपको भारतीय या फिर एशियाई मूल का ही खिलाड़ी नजर आए!
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