कोरोना की पहली लहर के बाद सरकार ने कोई तैयारी नहीं की.
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सुविधाएं तो सपना हो गई हैं?
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं पर नजर डालें तो यहां के हालात डराने वाले हैं। मरीजों को दाखिल करने के लिए बेड नहीं, अगर किसी को बेड मिल गया तो जीवन रक्षक दवाएं नहीं, डॉक्टर नहीं, अस्पताल में हैं, लेकिन ऑक्सीजन नहीं। और अगर जरूरत पर ऑक्सीजन मिल गई तो कब खत्म हो जाएगी इसका पता नहीं। इस जद्दोजहद के बाद अगर कहीं वेंटिलेटर की जरूरत पड़ गई तो वेंटिलेटर आम मरीज के लिए हैं ही नहीं। ऐसे में एक आम इंसान को कदम-कदम पर मिल रही है तो बस लाचारी और बेबसी।
कोरोना की देश में दस्तक वर्ष 2020 के मार्च से ही शुरू हो गई थी। तब इसे कोरोना की पहली लहर माना गया था। ठीक एक वर्ष बाद कोरोना की दूसरी लहर आई मार्च 2021 में। इस एक वर्ष में हमने कोई तैयारी नहीं की। कोरोना की पहली लहर के बाद देशभर में नेताओं ने सिर्फ भाषणबाजी की, हमने कोरोना को हरा दिया। देश के एक बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो यहां तक कहा कि कोरोना से कैसे लड़ा जाता है कोई हमसे सीखे।
इसके बाद देश में जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो देश के अन्य हिस्सों की तरह इस राज्य का काफी बुरा हाल हुआ। देश इस दौरान बड़ी अर्थव्यवस्था का दम भर रहा था, चीन से नाराज दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत आने का न्योता दे रहा था। अगर हम कोरोना की पहली लहर से सबक लेते और अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देते तो हमारे पास पैसे की भी कोई कमी नहीं थी। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने देश को दिन में तारे दिखा दिए, राम भरोसे स्वास्थ्य सुविधाओं की असलियत सामने आ गई।
पाकिस्तान सहित एशिया के छोट-छोटे देश भूटान आदि ने भारत को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मदद का भरोसा दिया। नेपाल और बांग्लादेश सरीखे देशों ने भारतीयों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी। अमेरिका जैसे देश ने अपने नागरिकों को भारत छोड़ने का संदेश जारी कर दिया। इतनी दुर्गति का जिम्मेदार आखिर कौन? देश को यह जानने का हक है। क्या इसके लिए चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव करवाने वाला आयोग जिम्मेदार है।
क्या हरिद्वार में जुटी लाखों लोगों की भीड़ या देश के उत्तरी भाग में होली के मौके पर खरीदारी करने को उमड़ी बेकाबू भीड़ उत्तरदायी है। वहीं उत्तर प्रदेश में कोरोना के पीक के दौरान भी पंचायत चुनाव बदस्तूर जारी रहे। इन सवालों के जवाब भविष्य में तलाशने होंगे। गिरना कोई बड़ी बात नहीं है, गिरकर संभल जाने का हुनर सीखने वाले ही सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं।
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