हिन्दुओं की शुरू से परंपरा रही कि उनने कहा- कहा सब ठीक है। सारे रास्ते ठीक हैं।
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सनातन यानी जो परम्परा में सदियों से चला आ रहा धर्म है। यानी हिन्दू धर्म का वैसा कोई नाम नहीं जैसा इस्लाम या ईसायत, बौद्ध या जैन धर्म है। भारत की संस्कृति धर्म के नाम पर सदा से उदार रही है। इस धर्म का कोई सैट पैर्टन नहीं है, इसलिए इस हिन्दुओं की संस्कृति में गज़ब की विविधता है। ये एक अतरंगी संस्कृति है। दुनिया में सबसे अलग, सबसे निराली, सबसे उदार और विरोधाभासी। क्योंकि भारत ने शुरू से माना कि ईश्वर तक पहुंचने की हजारों विधियां हैं। अब किसी भी विधि से उस तक पहुंच सकते हैं।
हिन्दुओं की शुरू से परंपरा रही कि उनने कहा- कहा सब ठीक है। सारे रास्ते ठीक हैं। राम को मानों या कृष्ण को, दुर्गा को मानों या काली को। या किसी को न मानो सिर्फ शून्य में ध्यान करो तुम्हें परमात्मा मिल जाएगा। यज्ञ करो तो ठीक न करो तो ठीक। नास्तिक हो जाओ तो भी हिन्दू होने का हक तुमसे कोई नहीं छीन सकता, इसीलिए हिन्दू धर्म ने कभी देश के अंदर या बाहर धर्मान्तरण के उपाय नहीं किए जैसे इस्लाम, ईसाइयत या बौद्ध भिक्षुओं ने किए, क्योंकि हिन्दुओं को ये बहुत शुरू में समझ आ गया था कि सत्य इतना बड़ा इतना विराट है कि अपने विरोधी सत्य को भी वह पूरी तरह से आत्मसात कर लेता है।
इस्लाम, इसाइयत और दूसरे तमाम धर्मों में ये विचार कभी विकसित नहीं हो सका। उसमें आईएसआईएस और बोकोहरम जैसे खूंखार आतंकी संगठन बन गए जिनकी तुलना सलमान अब 'हिन्दुत्व' से कर रहे हैं गोया हिन्दुत्व को बगदाद या नाइजेरिया का कोई आतंकी संगठन हों।
सलमान साहब को मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं एक जमाने से। वे अपनी बात को ठीक शब्दों में कह नहीं पाए। कभी मिलेंगे तो मैं उनसे पूछगा कि 'हिन्दुत्व' शब्द सावरकर ने प्रचारित किया क्या सिर्फ इसीलिए वो बोको हरम जैसा घृणित शब्द हो गया? हिन्दू धर्म या हिन्दुत्व को समझना है तो सिंधु घाटी की सभ्यता से शुरूआत करनी होगी। फिर वेद पुराण गीता रामायण की यात्रा करते हुए शंकर तक आना होगा। फिर शंकर के आगे का सफर तय करते हुए कबीर, तुलसी और फिर विवेकानंद तक आता है। वर्ना हिन्दुत्व के नाम पर ये मूढ़ताएं चलती रहेंगी।
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