अपने शानदार करियर में टेस्ट क्रिकेट ही शायद एक ऐसी पहेली है जिसे रोहित शर्मा पूरी तरह से अब तक सुलझा नहीं पाये हैं. लेकिन, आप अगर रोहित के फैन हैं , जो ये लेखक भी हैं, तो पलटकर बोलेंगे कि अरे ये क्या बात हुई। बिना पहेली सुलझाए ही रोहित का औसत 38 मैचों के बाद करीब 47 का कैसे है? ऐसा तो अजिंक्या रहाणे का भी नहीं है और चेतेश्वर पुजारा जो टेस्ट स्पेशलिस्ट और लाल गेंद वाले फॉर्मेट में दिग्गज माने जाते हैं, उनका भी औसत तो रोहित जैसा ही है, तो कैसे रोहित के लिए टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड का दौरा हीरो बनने का आखिरी मौका वाली बात कोई कह सकता है?
तो अब आपको सिक्के के दूसरे पहलू से वाकिफ करातें हैं। रोहित ने घर में यानी भारत में 18 टेस्ट मैच खेलें हैं और यहां उनका करीब 80 का औसत है और इसमें 7 शतक भी शामिल हैं। ये आंकड़े आपको महान ही नहीं बल्कि महानतम के करीब ले जाएं अगर ये पूरे करियर की कहानी होती, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू जो काफी मायूस करने वाला है और वो ये कि विदेश में खेले गए 20 टेस्ट में रोहित का औसत महज 27 का है जो उन्हें महान तो दूर की बात किसी भी प्लेइंग इलेवन में शामिल होने के लिए काफी नहीं होगा।
रोहित के अलावा अगर ये आंकड़े किसी और खिलाड़ी के होते तो उन्हें कब का अकेले छोड़ दिया जाता, लेकिन रोहित तो स्पेशल हैं, और ये ताना नहीं हैं। जब से रोहित ने बल्ला पकड़ा है उनके खेल को देखकर जानकर से लेकर एक आम फैन मंत्र-मुग्ध हुए बगैर रह नहीं सकता है और यही वजह है कि महेंद्र सिंह धोनी से लेकर विराट कोहली और हर चयनकर्ता ने कोशिश की है कि रोहित खुद को टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर स्थापित कर लें. यहां तक कि ऐसा करने के लिए कभी पुजारा तो कभी रहाणे जैसे खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी भी हुई।
वीवी एस लक्ष्मण जब 2013 में टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हुए तो उन्हें हर किसी को लगा कि रोहित स्वभाविक तौर पर उनकी जगह ले लेंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आखिर में थक-हार कर रोहित को ओपनर तक बना दिया गया क्योंकि सफेद गेंद की क्रिकेट में रोहित बेमिसाल हैं. लेकिन, अफसोस की बात है कि नतीजा अब भी असंतुष्टि वाला ही रहा है जिस तरह के खिलाड़ी वो हैं।.
ऐसे में ये इंग्लैंड दौरा जहां उन्हें 6 टेस्ट खेलने हैं, उनके करियर की सबसे अहम सीरीज है. पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जब बहुत सारे सीनियर खिलाड़ी चोटिल होकर वापस लौट रहे थे तो रोहित के पास हीरो बनने का शानदार मौका था. लेकिन, उस दौरे पर भी अनुभवी रहाणे और पुजारा के साथ-साथ युवा शुभमन गिल और रिषभ पंत महफिल लूट ले गए.