फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गणतंत्र दिवस विशेष: 26 जनवरी 1950 के कालजयी घटनाक्रम, जानिए युग परिवर्तन का एक-एक लम्हा

सार

26 जनवरी 1950 को भारत के भविष्य से सम्बन्धित युगान्तरकारी परिवर्तन के गवाह लम्हों को इसलिए भी याद करना जरूरी है क्योंकि लोग तिथि तो याद रखते हैं मगर उस तिथि के युग परिवर्तन करने वाले एक-एक लम्हें को याद रखना आसान नहीं है। 
विज्ञापन
गणतंत्र दिवस 1950 - फोटो : जयसिंह रावत
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत वर्ष के राजनीतिक इतिहास में दो तिथियां ऐसी हैं जिनको भारतवासियों की आने वाली पीढ़ियां भी कभी नहीं भुला पाएंगी। इनमें एक तिथि 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि की और दूसरी तिथि 26 जनवरी 1950 की है। पहली तिथि पर भारत को सदियों की अंग्रेजों की गुलामी के बाद आजादी मिली और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने मंत्रिमंडल के साथ भारत की सत्ता संभाली। दूसरी तिथि पर 26 जनवरी को हमें तीन बड़ी उपलब्धियां हासिल हुईं, जिनमें पहली उपलब्धि के रूप में वह संविधान मिला जिसे भारत के लोगों ने स्वंय अपना भविष्य तय करने के लिए बनाया था।

 

दूसरी उपलब्धि राष्ट्र को अपना मूल नाम ‘‘भारत ’’ वापस मिला। तीसरी बड़ी उपलब्धि ब्रिटिश सम्राट द्वारा नियुक्त गर्वनर जनरल के स्थान पर हमारा अपना ‘‘राष्ट्रपति’’ मिला। उसी दिन हमारा अपना संविधान लागू होने पर भारत का शासन चलाने के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा पारित भारत सरकार अधिनियम 1935 और भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 का भी निर्सन हो गया।

विज्ञापन


इसी तिथि पर गवर्नर जनरल का झंडा उतारा गया और भारत के पहले राष्ट्रपति ने अपना झंडा फहरा दिया। इसी तिथि पर संविधान सभा पहले आम चुनाव तक संसद में बदल गई। इसी दिन राष्ट्रपति के शपथ के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके मंत्रिमंडल ने अपने संविधान को हाजिर-नाजिर कर शपथ ली। इसी दिन भारत के प्रधान न्यायाधीश हीरालाल जे. कानिया ने भी पद की शपथ ली।
 

आजादी के बाद भी अंग्रेजों का संविधान ढो रहा था भारत

भारत को 15 अगस्त को आजादी अवश्य मिली मगर अपना संविधान न होने के कारण भारत का शासन 29 महीनों तक ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुसार ही चल रहा था। आजादी मिलने के बाद भी ब्रिटिश साम्राज्ञी द्वारा 21 फरवरी 1947 को नियुक्त गवर्नर जनरल लुइस माउंटबेटन 21 जून 1948 तक राष्ट्र प्रमुख के तौर पर पदासीन थे। माउंटबेटन के बाद गवर्नर जनरल के पद पर पहले और अंतिम भारतीय नेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी पदासीन अवश्य हुए मगर उनकी नियुक्ति भी ब्रिटिश साम्राज्ञी की ओर से हुई और उन्होंने भी तत्कालीन कानून के अनुसार साम्राज्ञी के प्रति निष्ठा और समर्पण की शपथ ली थी। यह तिथि हमें 26 जनवरी 1929 की याद भी दिलाती है जिस दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की घोषणा कर दी थी और उपनिवेश रहने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

 

भारत के भविष्य को बदलने वाले क्षण

26 जनवरी 1950 को भारत के भविष्य से संबंधित युगान्तरकारी परिवर्तन के गवाह लम्हों को इसलिए भी याद करना जरूरी है क्योंकि लोग तिथि तो याद रखते हैं मगर उस तिथि के युग परिवर्तन करने वाले एक-एक लम्हें को याद रखना आसान नहीं है। इसलिए पाठकों की याद ताजा करने और भावी पीढ़ियों के लिए भारत के भविष्य को तय करने वाले उन ऐतिहासिक क्षणों का संक्षिप्त विवरण दिया जा रहा है।

विज्ञापन

गणतंत्र दिवस 1950 - फोटो : जयसिंह रावत
वे ऐतिहासिक एवं कालजयी पल

ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार 26 जनवरी 1950 की प्रातः नव निर्वाचित राष्ट्रपति डा0 राजेन्द्र प्रसाद ने अपने 1, क्वीन विक्टोरिया रोड स्थित आवास से सदलबल नॉर्थ कोर्ट के लिए प्रस्थान किया, जहां वह ठीक 9 बजकर 50 मिनट पर पहुंचे। अपने एडीसी की अगवानी में वह कुछ समय के लिए आसीन हुए। ठीक उसी समय देश विदेश के मेहमान गवर्नमेंट हाउस के दरबार हाॅल में पहुंचने लगे थे। उसी समय ठीक 10 बजे राष्ट्रपति की पत्नी श्रीमती नामगिरी और अन्य पारिवारिक सदस्य भी दरबार हाॅल पहुंचे जिन्हें उचित सम्मान के साथ ’बी’ वाली सीटों पर बिठाया गया।

ठीक 10 बजकर 12 मिनट पर गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी, नवनियुक्त राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के साथ नाॅर्थ कोर्ट पहुंचते ही एक मिनट के अंदर दरबार हाॅल की सीढ़ियों पर पहुंचे। वहां से प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दोनों का स्वागत किया और दोनों अति विशिष्ट हस्तियों को दरबार हाल में उनके आसनों तक ले गए।

दरबार हाॅल की सीढ़ियों के शीर्ष से एडीसी के प्रोसेशन की शक्ल में दोनों हिस्तयां साथ-साथ और एक दूसरे की बगलगीर हो कर आगे बढ़े। उनके पीछे प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं सरदार बल्लभ भाई पटेल और मौलाना अब्दुल कलाम आदि चल रहे थे। मंच तक पहुंचते ही गवर्नर जनरल दाईं वाली और नव नियुक्त राष्ट्रपति बाईं सीट पर आसीन हुए। उसके बाद 10 बज कर 15 मिनट पर बैंड की धुन के साथ राष्ट्रगान शुरू हुआ और फौरन बाद दरबार हाॅल के दरवाजे बंद कर दिए गए।

गवर्नर जनरल की सम्प्रभुता सम्पन्न गणराज्य की घोषणा

समय का चक्र पल-पल घूमता रहा और ठीक 10 बजकर 18 मिनट पर गवर्नर जनरल ने नए सम्प्रभुता सम्पन्न गणराज्य के जन्म की घोषणा करने के साथ ही संविधान सभा का वह पत्र पढ़ा जिसमें गणराज्य के पहले राष्ट्रपति के नाम की घोषणा की गई थी। इसके तत्काल बाद गवर्नर जनरल ने नए राष्ट्रपति को दाईं वाली सीट पर बैठने के लिए आमंत्रित किया और स्वयं बाईं ओर की सीट पर आसीन हो गए।

तत्पश्चात संघीय न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश हरिलाल जेकिसुनदास कानिया आगे बढ़े और उन्होंने नव नियुक्त राष्ट्रपति को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति ने हिन्दी में शपथ ली। इसके बाद दरवार हाॅल के दरवाजे खोल दिए गए। इसके साथ ही गवर्नर जनरल का झंडा उतार कर भारत का झंडा फहराया गया।

इन औपचारिकताओं के बाद राष्ट्रगान समाप्त होते ही 31 तोपें नए गणराज्य के पहले राष्ट्रपति को सलामी के लिए गरज उठीं। तत्पश्चात 10 बजकर 28 मिनट पर गार्ड ऑफ ऑनर की औपचारिकता समाप्त होते ही राष्ट्रपति ने अपना संक्षिप्त भाषण दिया।
विज्ञापन

गणतंत्र दिवस - फोटो : जयसिंह रावत
राष्ट्रपति के भाषण के बाद गृह सचिव ने आगे बढ़ कर राष्ट्रपति से अनुमति चाही कि क्या राष्ट्रपति के पद ग्रहण करने की घोषणा सरकारी गजट में प्रकाशित कर उसे सभी जगह प्रसारित किया जाए।

ऐतिहासिक सेरेमनी की समाप्ति

गृह सचिव ने 10 बजकर 35 मिनट पर शपथ ग्रहण समारोह की समाप्ति की घोषणा करने की अनुमति राष्ट्रपति से मांगी। इसके बाद सभा विसर्जन होते ही राष्ट्रपति और गवर्नर जनरल एक जुलूस की शक्ल में दरबार हाॅल से बाहर निकले मगर इस बार उनके पीछे प्रधानमंत्री नहीं थे। निवर्तमान गवर्नर जनरल को एडीसी द्वारा मिंटो रूम में ले जाया गया जबकि राष्ट्रपति उत्तरी गलियारे से ऊपरी बरामदे में ले जाए गए। बाकी सभी मेहमान पुनः अपनी सीटों पर बैठ गए क्योंकि वहीं पर अब कैबिनेट मंत्रियों का शपथ ग्रहण होने वाला था।

कैबिनेट मंत्रियों का शपथ ग्रहण

ठीक 10 बजकर 38 मिनट पर उत्तरी गलियारे से प्रधानमंत्री नेहरू, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य, प्रधान न्यायाधीश और स्पीकर ने ऊपरी बरामदे में वरिष्ठताक्रम में बड़ी मेज के दानों ओर आसन ग्रहण किया। राष्ट्रपति ने प्रोटोकाॅल के अनुसार मेज के शीर्ष पर आसन ग्रहण किया। कैबिनेट सेक्रेटरी राष्ट्रपति के पीछे दाईं ओर बैठे। इसके बाद राष्ट्रपति ने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को और फिर प्रधान न्यायाधीश हरिलाल जेकिसुनदास कानिया को शपथ दिलाई।

इसके तत्काल बाद राष्ट्रपति, पूर्व गवर्नर जनरल, प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों, प्रधान न्यायाधीश और स्पीकर के साथ दरबार हाॅल के बाॅल रूम पहुंचे जहां विभिन्न देशों के राजनयिक और उनकी पत्नियां प्रतीक्षा में थे। यहां राजनयिकों ने राष्ट्रपति को अपने-अपने परिचय दिए। ठीक 12 बजे राष्ट्रपति बाॅल रूम से निकलने लगे तो तो बैंड की धुन पर राष्ट्रगान शुरू हो गया और इस कार्यक्रम का भी विसर्जन हो गया।

-------------------------

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें