जयपुर में स्थानीय बाजार घूमते फ्रेंच प्रेसिडेंट और पीएम मोदी
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मिट्टी के बर्तनों के उपयोग के पीछे साइंस
दरअसल, भारत में हर चीज के पीछे साइंस रहा है। मिट्टी के बर्तनों में खान-पान जैसे चाय के उपयोग के पीछे भी साइंस है। मिट्टी के कुल्हड़ में चाय पीने या पानी पीने के स्वास्थ्य से जुड़े कई प्रकार के लाभ होते हैं। रिसर्च गेट में प्रकाशित एक शोध के अनुसार मिट्टी के बर्तन में खाना-पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। मिट्टी के बर्तन में खाने का स्वाद भी बढ़ जाता है।
जहां प्लास्टिक ग्लास में गर्म चाय डालने से उसमें मौजूद केमिकल चाय में घुल जाते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों की संभावना को बढ़ा देते हैं, वहीं मिट्टी के कुल्हड़ में मौजूद कैल्शियम खाने के साथ मिलकर हमारे शरीर में कैल्शियम की पूर्ति करता है। मिट्टी के बर्तन खाने के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को सुरक्षित रखते हैं। चाय के जरूरी पोषक तत्व कुल्हड़ में प्रिजर्व रहते हैं। मिट्टी का कुल्हड़ तांबे या चांदी के बर्तन से भी कई गुना ज्यादा फायदेमंद बताया गया है।
कुल्हड़ का फायदा
कुल्हड़ का एक फायदा यह भी है कि ये हानिकारक बैक्टीरिया से हमें बचाता है, जबकि प्लास्टिक के गिलास या कांच के गिलास में मौजूद बैक्टीरिया हमारे भोजन के साथ शरीर में चले जाते हैं। मिट्टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते। कुल्हड़ की चाय पाचन के लिए भी फायदेमंद है। सबसे बड़ी बात जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से कहा, यह एक मोस्ट एनवायरमेंटल फ्रेंडली पात्र है, जो हमारे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है।
गुलाबी नगरी की चाय पीकर इमैनुएल मैक्रों अभिभूत दिखे और यह निश्चित है कि उनको भारतीय आतिथ्य सत्कार और कुल्हड़ की चाय पसंद आई। यह भी संभव है कि आने वाले दिनों में फ्रांस की किसी कॉफी या टी-शॉप पर मिट्टी के कुल्हड़ में चाय मिलती दिख जाए।
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