''किसानों की तरक्की के बिना देश की तरक्की संभव नहीं''
महात्मा गांधी द्वारा परिकल्पित “ग्राम-स्वराज” राजीव गांधी की प्राथमिकताओं में शामिल था। उन्होंने ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ की भावना के अनुरूप राम राज्य को साकार रूप देने का संकल्प लिया था। वे चाहते थे कि गांव के विकास का पैसा सीधे गांव की पंचायतों तक पहुंचे और गांव में विकास की दिशा ग्रामवासी मिल-जुलकर तय करें।
राजीव गांधी का मानना था कि किसान हमारे देश की रीढ़ हैं। खेती-किसानी की तरक्की के बिना देश की तरक्की संभव नहीं है। राजीव जी ने अपने प्रधानमंत्री काल में कृषि में ज्यादा पूंजीनिवेश का प्रावधान किया। कृषि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया। राजीव जी ने हरित क्रांति की समीक्षा की और यह पाया कि हरित क्रांति से गेंहू का उत्पादन तो काफी बढ़ा है, परंतु तिलहन और दलहन के क्षेत्र में अधिक सुधार की जरूरत है।
उन्होंने तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए तिलहन टेक्नोलॉजी मिशन बनाया। दलहन के लिए राष्ट्रीय परियोजना शुरू की। इसके अलावा उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में नए कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया तथा पेयजल, खाद्यान्न, दूरसंचार, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्रगति हेतु विभिन्न टेक्नोलाजी मिशन गठित किए।
राजीव गांधी का मानना था कि पर्यावरण संरक्षण और विकास की अवधारणा में संतुलन आवश्यक रूप से होना चाहिए। उन्होंने गंगा विकास प्राधिकरण की स्थापना कर गंगा नदी की सफाई का अभियान शुरू किया। राजीव जी ने अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों के दोहन को वरीयता दी एवं बायोगैस के प्रयोगों को बढ़ावा दिया।
विपक्ष के प्रति भी रखते थे समादर स्नेह
राजीव गांधी एक सच्चे लोकतंत्रवादी थे, एक ऐसे व्यक्ति थे जो सदा नए विचारों और रचनात्मक आलोचनाओं का स्वागत करते थे। उनके मन में विपक्ष के नेताओं के प्रति भी सम्मान था और विपक्ष से उनके राजनीतिक मतभेद अवश्य थे लेकिन एक-दूसरे के प्रति उनके मन में समादर स्नेह का भाव था। तत्कालीन विपक्ष के नेता श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने राजीव जी को श्रद्धांजलि देते वक्त कहा था-
राजीव जी बड़े अनुशासित व्यक्ति थे और वे मुझे जब भी मिलते थे, पूरे शिष्टाचार का पालन करते थे। एक बार मेरी तबियत बिगड़ गई और मुझे इलाज के लिए विदेश जाना था। जब यह बात राजीव जी को पता चली तो उन्होंने मेरे विदेश जाने का तत्काल प्रबंध कराया।
एक सांसद, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने जो भी भूमिका निभाई, सभी में अपनी कार्यकुशलता की अमिट छाप छोड़ी। सबकी सुनना और सबको साथ लेकर चलना राजीव जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी। वे आमजन की समस्याओं को बड़े ध्यान से सुनते थे और फिर सही दिशा निर्देश देकर उसको सुलझाने का काम करते थे, यही उनकी कार्यशैली थी।
भारत रत्न राजीव गांधी की स्मृति बनाए रखना सिर्फ रस्म अदायगी नहीं, बल्कि उस सपने का भी सम्मान होगा, जो उन्होंने नवीन, सक्षम और समृद्ध भारत के लिए देखा था। राजीव गांधी की स्मृति को संजोए रखना, उनके उस सपने का सम्मान होगा जो उन्होंने नए भारत के नव-निर्माण के लिए देखा था।
ऐसे युगपुरुष का यशस्वी जीवन, उनकी शहादत तथा उनकी अनगिनत स्मृतियां हमेशा देश के लिए प्रेरणादायक रहेंगी। राजीव गांधी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर उनके सद्विचारों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना, उन्हें आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर मानवता को समर्पित महामानव को नमन।
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