अंतरराष्ट्रीय जानवराधिकार संस्था के दबाव में प्रदेश सरकार कूनो नेशनल पार्क में बाड़ों में एसी और सोफे लगाने की दिशा में काम करेगी
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वैसे जंगली सूत्रों के अनुसार ख़बर यह है कि चीतों की नाराज़ी जंगल में वीआईपी कल्चर के दिन जल्दी से समाप्त होने को लेकर है। अब उन्हें भी सामान्य अतिक्रमित खनित जंगल में बिना किसी रिजर्वेशन के खुद का शिकार करके खाना और जीना पड़ेगा। लेकिन देर शाम तक चीते के ट्रेनर के माध्यम से सरकार के आलाधिकारी उसे मनाने की कोशिशें करते रहे।
बता दें कि चीतों का यह विरोध लंबा चला तो पहले से ही विभिन्न मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही प्रदेश सरकार के लिए यह एक नई समस्या होगी। वैसे सरकार के पास कुछ काम ना होने की स्थिति में चीता ही एक ऐसा काम है जो फाइलों से लगाकर विज्ञापनों तक बड़ी तेजी से दौड़ रहा है। चीता इतना आकर्षण का केंद्र है कि महीनों से पीएम से लगाकर सीएम तक चीते की खोज खबर में और वन विभाग वाले तीमारदारी में लगे हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय जानवराधिकार संस्था के दबाव में प्रदेश सरकार कूनो नेशनल पार्क में बाड़ों में एसी और सोफे लगाने की दिशा में काम करेगी, साथ ही इतने सारे कैमरों की वजह से चीतों की निजता के उल्लंघन की बात भी उठ रही है। उस संबंध में चीतों एवं संस्था की नाराजगी को दिल्ली तक पहुंचा दिया गया है।
वैसे चीते अभी अल्पसंख्यक हैं। लेकिन उनको उचित सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी, सही निजता का माहौल मिलेगा तो उससे उनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी। तब सरकार के पास में प्रदेश को चीता स्टेट मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा।
यदि कभी जंगल में चुनाव करवाने पड़े तो सरकार के लिए शहरी ग्रामीण के साथ जंगली सीटों पर चीतों के वोटों का महत्व रहेगा। इसके चलते प्रदेश सरकार के राजस्व पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी चीते के मान वंदना में लगे हैं। ग्रामीण लगातार उसे प्यार से ‘गो ओबान...गो’ कहकर जंगल वापसी कराने की कोशिश में है।
वैसे जंगल न्यूज़ के अनुसार चीता साशा की दुखद मौत के बाद सियाया भाभी ने चार बच्चों को जन्म दिया है। जच्चा एवं बच्चा स्वस्थ बताए जा रहे हैं। खुले जंगल में मौजूद आशा, एल्टन और फ्रेडी इंसानों के हर मूवमेंट पर नज़र रखे हैं। उन्होंने वनकर्मियों के गले में रेडियो कॉलर से निगरानी करवाने की मांग भी रखी है।
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