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व्यंग्य: मध्य प्रदेश को चीता स्टेट बनाने की मांग, चीते कर सकते हैं विरोध प्रदर्शन

सार

अंतरराष्ट्रीय जानवराधिकार संस्था के दबाव में प्रदेश सरकार कूनो नेशनल पार्क में बाड़ों में एसी और सोफे लगाने की दिशा में काम करेगी, साथ ही इतने सारे कैमरों की वजह से चीतों की निजता के उल्लंघन की बात भी उठ रही है। उस संबंध में चीतों एवं संस्था की नाराजगी को दिल्ली तक पहुंचा दिया गया है। 
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प्रदेश में टाइगर्स और तेंदुओं की गुंडागर्दी एवं उनको राजनैतिक संरक्षण के कारण चीते दूसरे दर्जे में ही गिने जा रहे हैं। - फोटो : Kuno National Park
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विस्तार
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मध्य प्रदेश को अब केवल संख्या के आधार पर टाइगर स्टेट माना नहीं जा सकता। चीतों के बढ़ते राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए प्रदेश को 'द ओनली वन-चीता स्टेट की मांग को लेकर चीतों का आंदोलन जारी है। नामीबिया से कूनो सेंचुरी में पधारे चीतों के प्रमुख ओबान तो अपना बाड़ा और बंधन छोड़कर खेतों में विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

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जंगल टाइम्स को केवल अंग्रेजी में दिए एक्सक्लुसिव इंटरव्यू में चीतों की खाप पंचायत के सरदार ओबान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदीजी ने उन्हें एवं उनके अफ्रीकी परिजनों को वायुसेना के विशेष विमान से भारत लाकर एवं हेलीकॉप्टर्स से कूनो तक लाने की व्यवस्था करने के साथ रहने और खाने के पट्टे दिए हैं। 
 

प्रदेश में टाइगर्स और तेंदुओं की गुंडागर्दी एवं उनको राजनैतिक संरक्षण के कारण चीते दूसरे दर्जे में ही गिने जा रहे हैं। पीएम, सीएम, कैबिनेट मंत्रियों से सीधे संपर्क और बड़े अधिकारियों के समर्थन के होते भी चीतों को अपने अस्तित्व पर खतरा लग रहा है। इसलिए चीतों के प्रतिनिधिमंडल के नेता ओबान ने सीएम से प्रदेश को चीता स्टेट बनाने की मांग की है।

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ओबान ने जंगल टाइम्स से कहा कि हम कोई पड़ौसी देश से घुसे रोहिंग्या नहीं है। ना ही हम कोई शरणार्थी हैं। हमें तो बड़े सम्मान से पीएम द्वारा अपने 72 वें जन्मदिन भारत की नागरिकता दी है। उनके आदेश पर ही मध्य प्रदेश में कूनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगल रिसॉर्ट में बसाने का आग्रह स्वीकार किया है, और इशारा मिलते ही यहां से कभी भी गुजरात के गिर में पलायन कर सकते हैं। 


ओवान ने कहा कि वह सेंचुरी की (अति) व्यवस्थाओं और अतिदेखी से तमाम नाराजगी के बावजूद भी केवल अपने बाड़े से बाहर भर निकले हैं। उसने गांव में ना घुसकर केवल ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का जायजा ही लिया है। मुख्यमंत्री के प्रशासन को चुनौती दे दी है। 

 

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अंतरराष्ट्रीय जानवराधिकार संस्था के दबाव में प्रदेश सरकार कूनो नेशनल पार्क में बाड़ों में एसी और सोफे लगाने की दिशा में काम करेगी - फोटो : istock
वैसे जंगली सूत्रों के अनुसार ख़बर यह है कि चीतों की नाराज़ी जंगल में वीआईपी कल्चर के दिन जल्दी से समाप्त होने को लेकर है। अब उन्हें भी सामान्य अतिक्रमित खनित जंगल में बिना किसी रिजर्वेशन के खुद का शिकार करके खाना और जीना पड़ेगा। लेकिन देर शाम तक चीते के ट्रेनर के माध्यम से सरकार के आलाधिकारी उसे मनाने की कोशिशें करते रहे।

बता दें कि चीतों का यह विरोध लंबा चला तो पहले से ही विभिन्न मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही प्रदेश सरकार के लिए यह एक नई समस्या होगी। वैसे सरकार के पास कुछ काम ना होने की स्थिति में चीता ही एक ऐसा काम है जो फाइलों से लगाकर विज्ञापनों तक बड़ी तेजी से दौड़ रहा है। चीता इतना आकर्षण का केंद्र है कि महीनों से पीएम से लगाकर सीएम तक चीते की खोज खबर में और वन विभाग वाले तीमारदारी में लगे हुए हैं। 
 

अंतरराष्ट्रीय जानवराधिकार संस्था के दबाव में प्रदेश सरकार कूनो नेशनल पार्क में बाड़ों में एसी और सोफे लगाने की दिशा में काम करेगी, साथ ही इतने सारे कैमरों की वजह से चीतों की निजता के उल्लंघन की बात भी उठ रही है। उस संबंध में चीतों एवं संस्था की नाराजगी को दिल्ली तक पहुंचा दिया गया है। 

वैसे चीते अभी अल्पसंख्यक हैं। लेकिन उनको उचित सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी, सही निजता का माहौल मिलेगा तो उससे उनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी। तब सरकार के पास में प्रदेश को चीता स्टेट मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। 


यदि कभी जंगल में चुनाव करवाने पड़े तो सरकार के लिए शहरी ग्रामीण के साथ जंगली सीटों पर चीतों के वोटों का महत्व रहेगा। इसके चलते प्रदेश सरकार के राजस्व पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी चीते के मान वंदना में लगे हैं। ग्रामीण लगातार उसे प्यार से ‘गो ओबान...गो’ कहकर जंगल वापसी कराने की कोशिश में है। 


वैसे जंगल न्यूज़ के अनुसार चीता साशा की दुखद मौत के बाद सियाया भाभी ने चार बच्चों को जन्म दिया है। जच्चा एवं बच्चा स्वस्थ बताए जा रहे हैं। खुले जंगल में मौजूद आशा, एल्टन और फ्रेडी इंसानों के हर मूवमेंट पर नज़र रखे हैं। उन्होंने वनकर्मियों के गले में रेडियो कॉलर से निगरानी करवाने की मांग भी रखी है। 
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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