जनापवादे सततं निविष्टम्।
मातङ्गमुन्मत्तमिवोन्नदन्तं
त्यजेत तं श्वानमिवातिरौद्रम्।।
अर्थात् जो सदा लोगों की निंदा में तत्पर रहता है, वह मनुष्य के शरीररूप घर में रहने वाला भेड़िया है। वह सदा अशांत बना रहता है। मतवाले हाथी के समान चीत्कार करता है और अत्यंत भयंकर कुत्ते के समान काटने दौड़ता है। श्रेष्ठ पुरुष को चाहिए कि उसे सदा के लिए त्याग दें।
शांतिपर्व 114/17
( पितामह भीष्म का युधिष्ठिर को हितोपदेश। )
जब मुझे एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के नए ग्रेजुएट छात्रों के सामने बोलने को कहा गया, तो मैं काफी रोमांचित था। कॉलेज के छात्रों से बात करने वाला कोई भी व्यक्ति इससे अवगत होगा कि अवसाद, मानसिक समस्याओं और यहां तक कि आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्तियों के कारण आज युवा वयस्क होना कितना मुश्किल है। किसी भी स्नातक समारोह में दो भावनाएं दिखती हैं। स्नातक विद्यार्थियों के चमकते चेहरे कि उन्होंने मेहनत की और एक उपलब्धि हासिल की।
दूसरी ओर, इन युवाओं के परिवार व दोस्त होते हैं, जो आनंद की एक अलग भावना में होते हैं। वे अपने बारे में नहीं सोच रहे होते। उनकी खुशी अपने प्रिय के चेहरे की खुशी, उसकी चमक, उसकी यात्रा की प्रगति और उसके संपूर्ण व्यक्तित्व को देखकर होती है। अपनी जीत पर खुश होना तो स्वाभाविक है। लेकिन दूसरे की उपलब्धियों पर आप तभी नाचते हैं, जब आपका दिल किसी से बंधा होता है। यह भावना वर्षों तक डायपर बदलने, गाड़ी चलाना सिखाने, रात में चिंता करने, रसोई में नाचने, आंगन में खेलने और साथ में बिताए गए अनगिनत पलों से आती है।
लोग कहते हैं कि प्यार अंधा होता है। लेकिन, प्रियजनों के प्रति प्यार अंधा नहीं, बल्कि सतर्क होता है। जब आप कमजोर महसूस कर रहे होते हैं, तो यह प्यार आपको महसूस करता है, आपकी प्रतीक्षा करता है, दिलासा देता है और माफ भी करता है। इतालवी उपन्यासकार सेसारे पावेसे लिखते हैं, ‘आपको प्यार किया जाएगा, लेकिन उस दिन जब सामने वाले द्वारा ताकत दिखाए बगैर आप अपनी कमजोरी दिखाएंगे।’ सोशल मीडिया के बनावटी युग में बेवजह प्रदर्शन से बचते हुए भावनात्मक ईमानदारी रखना ज्यादा जरूरी है।
मेरी एक मित्र कैथरीन बैली कॉक्स ने एक बार मुझे बताया कि जब उनकी पहली बेटी का जन्म हुआ, तो उसे एहसास हुआ कि वह उसे विकास की स्वाभाविक जरूरतों से कहीं ज्यादा प्यार करती है। मुझे कैथरीन का यह वाक्य बहुत पसंद आया, क्योंकि इसमें मानवीयता और संवेदनशीलता दोनों झलकती हैं।
दरअसल, कुछ चीजें हम जीव विज्ञानी जरूरतों को पूरा करने के लिए करते हैं। कुछ चीजें हम दुकान या मकान का किराया चुकाने के लिए करते हैं। लेकिन ये सिर्फ भौतिक प्रेरणाएं हैं, जो उस भाव को नहीं बताती, जो हमारी आत्मा उस वक्त महसूस करती है, जब हम अपने किसी प्रियजन को कोई उपलब्धि पाते हुए देखते हैं। ऐसे क्षण जिंदगी में कम ही आते हैं, लेकिन किसी के साथ गहरे स्नेह के स्तर पर होने का यह एहसास जादुई है।