Paul Robeson 125th Birth Anniversary
- फोटो : IPTA
सारी दुनिया में पॉल रॉबसन पर हुई इस कार्रवाई का विरोध किया गया। विश्व के महान कवियों ने पॉल रॉबसन पर कविताएं लिखीं और उन पर लगे प्रतिबन्ध हटाने की मांग की गई। आख़िरकार आठ साल के बाद 1958 में पॉल को उनका पासपोर्ट वापस मिल सका।
उस दौरान चिली के महान कवि पाब्लो नेरुदा ने और तुर्की के क्रांतिकारी कवि नाज़िम हिकमत ने पॉल रॉबसन के लिए जो कविताएं लिखीं उनका पाठ और गायन भी किया गया। नाज़िम हिकमत के गीत "वो हमारे गीत क्यों रोकना चाहते हैं, नीग्रो भाई हमारे पॉल रॉबसन" को शर्मिष्ठा घोष के निर्देशन में विनीत तिवारी, उजान, अथर्व, युवराज शर्मा, लक्ष्य जैन, निशा ढोले और कत्यूषा ने गाया।
इस गीत का बांग्ला अनुवाद किया था हेमांगो बिस्वास ने और संगीतबद्ध किया था कमल सरकार ने। "पॉल रॉबसन के लिए एक गीत" शीर्षक से पाब्लो नेरुदा की कविता का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद किया विनीत तिवारी ने और उसका पाठ सारिका श्रीवास्तव ने किया। जया मेहता ने पॉल रॉबसन के नाटकों और फिल्मों में उनकी विशिष्ट शैली को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि "वूडू", "ऑथेलो" और "एम्परर जोंस" जैसे नाटकों में काम करने से पॉल रॉबसन प्रतिष्ठा बहुत बढ़ी।
इन नाटकों में पहली बार कोई मुख्य किरदार अश्वेत बनाया गया था। पॉल ने ऑथेलो की एक अलग ही व्याख्या की जो बहुत सराही गई। उनकी पहली फिल्म "बॉडी और सोल" (1925) को भी बहुत प्रशंसा मिली। जया मेहता ने साथ ही पॉल रॉबसन के विश्व शांति कायम करने के प्रयासों पर भी रौशनी डाली।
पॉल ने पेरिस शांति सम्मेलन को भी सम्बोधित किया और वर्ल्ड पीस काउंसिल की मीटिंग को भी सम्बोधित किया। पॉल रॉबसन ने केवल अमेरिकी अश्वेतों के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी दमितों-शोषितों के लिए संघर्ष किया। दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद की नीतियों के ख़िलाफ़ उनके काम को उनके मरने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने रेखांकित किया।
विनीत तिवारी ने बताया कि जब 1958 में पॉल रॉबसन 60 वर्ष के हुए तो दुनिया के 50 देशों में उनका जन्मदिन मनाया जिसमें रूस, चीन, भारत आदि देश शामिल थे। पॉल रॉबसन की ख्याति का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब एक अमेरिकी पहली दफ़ा भारत आया और गांधी जी से मिला तो गांधी जी ने उससे पहला सवाल ही यह पूछा कि पॉल रॉबसन कैसे हैं।
कार्यक्रम के अंत में इप्टा के गायन समूह ने पॉल रॉबसन के विश्व प्रसिद्ध गीत "ओल्ड मैन रिवर - मिसिसिपी" से प्रभावित और लगभग उसी धुन पर असमिया संगीतकार और गायक भूपेन हज़ारिका के प्रसिद्द गीत "ओ गंगा, बहती हो क्यों?" को प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
इंदौर स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क की प्रभारी प्राचार्या डॉ. सुधा जैन ने विद्यार्थियों को पॉल रॉबसन के बारे में इतनी रोचक तरह से जानकारी देने के लिए इप्टा के सभी सदस्यों का आभार माना और विद्यार्थियों को पॉल रॉबसन के बारे में और अधिक पढ़ने और उनसे प्रेरणा लेने के लिए कहा। इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ ही डॉ. रितेश महाडिक, डॉ. मीनाक्षी कार, शैला शिंत्रे, आदि भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संयोजन किया था बिहान संवाद के संपादक रविशंकर ने।
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