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सिद्ध किया कि सिद्धहस्त सियासतदां हैं सिद्धारमैया

सार

कर्नाटक में दोनों नेताओं ने मिलकर चुनाव लड़ा और पार्टी को जीत दिलाई। यह उनकी म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग थी कि आगे कैसे काम किया जाएगा। खैर, सिद्धारमैया के नाम पर कांग्रेस हाईकमान ने मुहर लगा दी है। सिद्धारमैया ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे।
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कांग्रेस नेता सिद्धारमैया होंगे कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कर्नाटक की कमान सिद्धारमैया संभालेंगे। यह तय हो गया है। चुनाव नतीजे के आने के बाद से ही मीडिया ट्रॉयल शुरू हो गया था। मीडिया में यह शोर मचने लगा था कि मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कर्नाटक में कांग्रेस फंस गई है। दोनों नेता सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार बगावती तेवर अपना रहे हैं। इस तरह की बातें खूब फैलाई जा रही थी। पर सच्चाई यह है कि ऐसा कुछ भी नहीं था।

सिद्धारमैया के नाम पर कांग्रेस हाईकमान ने लगाई मुहर

कर्नाटक में दोनों नेताओं ने मिलकर चुनाव लड़ा और पार्टी को जीत दिलाई। यह उनकी म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग थी कि आगे कैसे काम किया जाएगा। खैर, सिद्धारमैया के नाम पर कांग्रेस हाईकमान ने मुहर लगा दी है। सिद्धारमैया ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे। आइए समझते हैं कि सिद्धारमैया में ऐसी क्या खास बात रही, जो पार्टी हाईकमान को पसंद आई।

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सिद्धारमैया कांग्रेस के कर्नाटक में सबसे बड़े नेताओं में से एक हैं। उन्हें पहले दिन से ही मुख्यमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक जीवन में 12 चुनाव लड़े और 9 में जीत हासिल की। सिद्धारमैया कर्नाटक में पहले भी मुख्यमंत्री रहे हैं। 1994 में जनता दल की सरकार में वे कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री भी रहे।

खड़गे के करीबी माने जाते हैं सिद्धारमैया

सिद्धारमैया की प्रशासनिक पकड़ अच्छी मानी जाती है। सिद्धारमैया भी डीके की तरह गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। सिद्धारमैया को 2008 में जेडीएस से कांग्रेस में लाने में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अहम भूमिका मानी जाती है। ऐसे में वे खड़गे के काफी करीबी बताए जाते हैं।

सिद्धारमैया 2013 से 2018 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने टीपू सुल्तान को कर्नाटक में नायक के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की थी। इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर काफी शोर मचा था। शायद यही वजह है कि मुस्लिम समुदाय में उनकी अच्छी पैठ बन गई, जो कांग्रेस के लिए वोट बैंक बन चुकी है। सिद्धारमैया कुरुबा समुदाय (ओबीसी) से आते हैं।

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कर्नाटक में तीसरा बड़ा समुदाय है। इतना ही नहीं सिद्धारमैया राज्य के सबसे बड़े ओबीसी नेता माने जाते हैं। शिवकुमार की तुलना में सिद्धारमैया को ज्यादा बड़ा जन नेता माना जाता है। ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिसे कांग्रेस हाईकमान नजरअंदाज नहीं कर सकता था। अंततः सिद्धारमैया के नाम पर सबकी मुहर लग गई।

दिलचस्प यह है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया की कुछ खामियों को भी नजरअंदाज किया है। इस मुख्य रूप से 2018 का चुनाव है। इस चुनाव में में सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी ने सिद्धारमैया के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा। वे शिवकुमार की तुलना में कम एक्टिव दिखे। सिद्धारमैया 76 साल के हैं।

अगर पार्टी भविष्य की राजनीति को देखकर युवा नेतृत्व पर भरोसा जताती तो सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री बनने में उनकी उम्र रोड़ा बन सकती थी, लेकिन इस बात को भी नजरअंदाज किया गया। समझा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया के अनुभवी सियासतदान होने का लाभ दिया है। पार्टी को भरोसा है कि वे राज्य में कांग्रेस को और मजबूत बनाए रखने के लिए काम करेंगे। साथ ही अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के प्रदर्शन को पहले से बेहतर बनाएंगे। 

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कांग्रेस हाईकमान के विश्वासपात्र हैं डीके शिवकुमार - फोटो : ट्विटर/रणदीप सिंह सुरजेवाला

एक नजर कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर

अब चर्चा रनरअप रहे कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार (डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार) की। डीके शिवकुमार बेहद विनम्र हैं और कांग्रेस हाईकमान के विश्वासपात्र भी। डीके शिवकुमार को जब कांग्रेस ने कर्नाटक का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, उस वक्त पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी।

प्रदेश अध्यक्ष रहते शिवकुमार ने न सिर्फ पार्टी को खड़ा किया, बल्कि राज्य में पार्टी को पूर्ण बहुमत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। शिवकुमार कांग्रेस के वफादार हैं। वे 1989 से अब तक 8 बार विधायक बन चुके हैं। डीके वोक्कालिगा समुदाय के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं। इस समुदाय का कर्नाटक में 50 सीटों पर प्रभाव माना जाता है।

राहुल, सोनिया और प्रियंका गाधी के पसंदीदा

डीके गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी उन्हें पसंद करते हैं। जब शिवकुमार को ईडी ने गिरफ्तार किया था, तब सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुंची थीं। डीके शिवकुमार को संकटमोचक भी कहा जाता है। जब कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस हुआ था, तब उन्होंने कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी जान लगा दी थी।

इतना ही नहीं जब कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में भी संकट आया, तब शिवकुमार ने अहम भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में ही कांग्रेस विधायकों को रिजॉर्ट में ठहराया गया। शिवकुमार सबसे अमीर विधायक हैं। उनके पास 1214 करोड़ रुपये की संपत्ति है। कांग्रेस नेतृत्व जानता है कि शिवकुमार पर दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ने और आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए धन जुटाने के लिए भरोसा किया जा सकता है।

सीएम न बनाने के पीछे क्या ये है वजह?

जानकारों का कहना है कि डीके के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। वे जेल भी जा चुके हैं। उनके खिलाफ कई मामलों में जांच चल रही है। ऐसे में कांग्रेस अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाती तो बीजेपी इसे मुद्दा बना सकती थी, क्योंकि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार को लेकर बोम्मई सरकार पर जमकर हमला बोला था। डीके अभी एक भी बार सीएम नहीं बने हैं। हालांकि, वे मंत्री रहे हैं। ऐसे में उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है।

इतना ही नहीं राज्य में उनकी लोकप्रियता सिद्धारमैया की तुलना में कम है। हालांकि, मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर डीके ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें कुर्सी का कोई मोह नहीं है। पार्टी हाईकमान जो भी फैसला लेगा, उन्हें मंजूर है। बहरहाल, सिद्धारमैया कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनेंगे। अब देखना यह है कि आगे क्या होता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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