कांग्रेस हाईकमान के विश्वासपात्र हैं डीके शिवकुमार
- फोटो : ट्विटर/रणदीप सिंह सुरजेवाला
एक नजर कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर
अब चर्चा रनरअप रहे कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार (डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार) की। डीके शिवकुमार बेहद विनम्र हैं और कांग्रेस हाईकमान के विश्वासपात्र भी। डीके शिवकुमार को जब कांग्रेस ने कर्नाटक का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, उस वक्त पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी।
प्रदेश अध्यक्ष रहते शिवकुमार ने न सिर्फ पार्टी को खड़ा किया, बल्कि राज्य में पार्टी को पूर्ण बहुमत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। शिवकुमार कांग्रेस के वफादार हैं। वे 1989 से अब तक 8 बार विधायक बन चुके हैं। डीके वोक्कालिगा समुदाय के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं। इस समुदाय का कर्नाटक में 50 सीटों पर प्रभाव माना जाता है।
राहुल, सोनिया और प्रियंका गाधी के पसंदीदा
डीके गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी उन्हें पसंद करते हैं। जब शिवकुमार को ईडी ने गिरफ्तार किया था, तब सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुंची थीं। डीके शिवकुमार को संकटमोचक भी कहा जाता है। जब कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस हुआ था, तब उन्होंने कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी जान लगा दी थी।
इतना ही नहीं जब कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में भी संकट आया, तब शिवकुमार ने अहम भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में ही कांग्रेस विधायकों को रिजॉर्ट में ठहराया गया। शिवकुमार सबसे अमीर विधायक हैं। उनके पास 1214 करोड़ रुपये की संपत्ति है। कांग्रेस नेतृत्व जानता है कि शिवकुमार पर दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ने और आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए धन जुटाने के लिए भरोसा किया जा सकता है।
सीएम न बनाने के पीछे क्या ये है वजह?
जानकारों का कहना है कि डीके के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। वे जेल भी जा चुके हैं। उनके खिलाफ कई मामलों में जांच चल रही है। ऐसे में कांग्रेस अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाती तो बीजेपी इसे मुद्दा बना सकती थी, क्योंकि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार को लेकर बोम्मई सरकार पर जमकर हमला बोला था। डीके अभी एक भी बार सीएम नहीं बने हैं। हालांकि, वे मंत्री रहे हैं। ऐसे में उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है।
इतना ही नहीं राज्य में उनकी लोकप्रियता सिद्धारमैया की तुलना में कम है। हालांकि, मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर डीके ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें कुर्सी का कोई मोह नहीं है। पार्टी हाईकमान जो भी फैसला लेगा, उन्हें मंजूर है। बहरहाल, सिद्धारमैया कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनेंगे। अब देखना यह है कि आगे क्या होता है।
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