भारत दुनिया का सबसे बड़ा टाइगर रेंज वाला देश है। बाघ परियोजना के शुरू होने के समय 9 टाइगर रिजर्व थे, वहीं अब देश में 55 टाइगर रिजर्व हो गए हैं।
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बाघ परियोजना और भारत
1973 में जब बाघ परियोजना शुरू हुई तो बाघों की गिनती के लिए वन विभाग के कर्मचारी उनके पदचिह्नों के निशान के लिए ग्लास और बटर पेपर का इस्तेमाल किया करते थे। अब वन विभाग के कर्मचारी नए जमाने की तकनीकी के साथ कदमताल करते हुए जियो टैगिंग और कैप्चर-मार्क-एंड-रीकैप्चर मेथड का इस्तेमाल करते हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा टाइगर रेंज वाला देश है। बाघ परियोजना के शुरू होने के समय 9 टाइगर रिजर्व थे, वहीं अब देश में 55 टाइगर रिजर्व हो गए हैं। बाघ अभ्यारणों के प्रबन्धन का प्रभाव, उसका मूल्यांकन, बाघों की पुनर्स्थापना जैसी नीतियों के साथ साथ नए टाइगर रिजर्व की घोषणा भी बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी का प्रमुख कारण है। प्रधानमंत्री श्री मोदी देशवासियों को लगातार वन्य जीवों के प्रति संवेदनशील होने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। इसका भी सकारात्मक असर पड़ रहा है।
पिछले वर्ष संपन्न हुए जी 20 की अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में बाघों और प्रकृति संरक्षण की अपनी भावना को भारत सरकार ने निरंतर प्रोत्साहित किया। केंद्र सरकार चीते को नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लेकर आई है। भारत में जब चीते आए तो इसकी चहुंओर सराहना हुई। चीतों के आगमन से लोगों में और अधिक वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता आई।
चर्चा का विषय बना रहा। लोगों में चीते को लेकर उत्सुकता रही। भारत में चीते का परिवार बढ़ रहा है। टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। भारत सरकार न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेहतर काम कर रही है, बल्कि प्रकृति एवं वन्य जीव संरक्षण की दिशा में भी निरंतर सार्थक प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल बाघों की आबादी को घटने से बचाया है बल्कि बाघों को फल-फूलने के लिए एक बेहतरीन इकोसिस्टम भी प्रदान किया है।
लेखक, केंद्रीय विदेश तथा पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री हैं
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