दो साल बाद 2007 में फिर जो राइट ने कैरा नाइटली को लेकर ‘एटोनमेंट’ बनाई। बचपन में व्यक्ति खुद को बहुत बुद्धिमान समझते हुए कुछ ऐसा कर जाता है, जिसके कारण कई जिंदगियां बर्बाद हो जाती हैं। एक झूठ जो तबाही मचाता है, वह लाख पश्चाताप के बाद भी ठीक नहीं किया जा सकता है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति पश्चाताप की अग्नि में जलता है। मगर पश्चाताप से पाप का मोचन नहीं होता है।
इआन मैकइवान के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है यह करीब दो घंटे की फिल्म। तेरह साल की उम्र में बोला गया झूठ सारी जिंदगी लिख कर उससे होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर पाता है। फिल्म में अभिनय, कहानी और कैमरावर्क सब उत्तम कोटि का है। बिना खुद देखे इस फिल्म को नहीं समझा जा सकता है और न ही इसका आनंद लिया जा सकता है।
‘आना कैरेनीना’ उपन्यास पर आधारित फिल्म
फिर पांच साल बाद हम जो राइट तथा कैरा नाइटली को साथ पाते हैं। एक बार इस बार की फिल्म भी साहित्य आधारित है। इस बार रूस के विश्व प्रसिद्ध रचनाकार लियो टॉल्सटॉय लेखक हैं और उपन्यास है ‘आना कैरेनीना’। इस कालजयी उपन्यास पर अब तक 27 फिल्म बनने की बात इंटरनेट डाटा कहता है। हम खुद को जो राइट कीफिल्म पर सीमित रखेंगे।
दो घंटे की इस फिल्म का स्क्रीनप्ले प्रसिद्ध नाटककार टॉम स्टॉपर्ड ने लिखा है। आना के पति कैरेनीन के रूप में प्रसिद्ध अभिनेता जूड लॉ हैं, आना के रूप में हैं कैरा नाइटली। गति का प्रतिनिधित्व करती कैरा नाइटली डायनमिक हैं। कैरा नाइटली के डॉयमंड अपनी चमक बिखेर रहे हैं। उपन्यास का यह एक अनोखा संस्करण है। तकरीबन पूरी फिल्म स्टेज सेटिंग पर फिल्माई गई है।
नाटकीयता से भरपूर अभिनय। यहां तक कि घुड़दौड़ की प्रतियोगिता का प्रमुख दृश्य भी स्टेज पर फिल्माया गया है। यह फिल्म तकनीकि का भरपूर उपयोग करती है। शैली के क्या कहने, प्रकाश-छाया, कैमरे के एंग्ल्स, पल-पल बदलते सेट, परदा, पोशाक, जेवरात,फर्नीचर, स्केटिंग रिंग, एडीटिंग। ओह! क्या नहीं है यहां! सब कुछ इतना चमकता हुआ, इतना आकर्षक है कि दर्शक इन सब में खो जाता है।
यही इस फिल्म की ताकत है और यही इस फिल्म की सीमा भी। ग्रेट एक्ट्रेस कैरा नाइटली के विषय में निर्देशक जो राइट का कहना है कि कैरा नाइटली मजबूत और बहादुर है। उनमें तरह-तरह की भूमिका करने का साहस है। वे आना कैरेनीना की आंतरिक संवेदनाओं-भावनाओं को उभारने में सफ़ल रही हैं।
जो राइट के अनुसार उन्होंने ‘आना केरेनीना’ एक बैले के रूप में बनाया है। लोकेशन पर जा कर शूटिंग न करके जो राशि बची वह निर्देशक ने कपड़ों, सेट डेकोरेशन और कैमरा मूवमेंट तथा कोरियोग्राफ़ी पर दिल खोल कर खर्च की। सेट डेकोरेशन तथा फोटोग्राफ्री के लिए इसे ऑस्कार नामांकन प्राप्त हुए।
जो राइट की जिस एक और फिल्म की चर्चा करना चाहूंगी वह है, ‘द वूमन इन द विन्डो’। 2021 की इस फिल्म में खुले स्थान एवं भीड़ से भयभीत एक स्त्री (एमी एडम्स) न्यूयॉर्क में अकेली रह रही है। वह अपने पड़ोसी की जासूसी करने लगती है और एक बहुत बेचैन करने वाला अत्याचार की साक्षी बनती है। क्या सच में अत्याचार हुआ अथवा यह उस स्त्री की कल्पना मात्र है।
फिल्म देखते हुए हिचकॉक की ‘रियर विन्डो’ की याद आनी स्वाभाविक है। परफिल्म देखें और स्वयं तय करें कि यथार्थ क्या है। पौने दो घंटे से कम अवधि की यह फिल्म भी साहित्य पर आधारित है। 2018 में ए.जे. फिन का उपन्यास बेस्ट-सेलर था। हालांकि ‘आना कैरेनीना‘,‘एटोनमेंट’ या ‘प्राइड एंड प्रिज्यूडीज’ से इसकी तुलना नहीं हो सकती है।
जो राइट स्वयं को पैदाइशी सिने-निर्देशक मानते हैं और बहुत भाग्यशाली भी मानते हैं। आशा है शीघ्र हमें उनसे औरफिल्में प्राप्त होंगी।
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