विरल फिल्मों में 1956 में हिन्दी में बनी ‘26th जनवरी’ (निर्देशक: रमेश सहगल, अभि: अजित और नलिनी जयवंत, निशी, सप्रू, बी. एम. व्यास, कुकू, संगीत: सी रामचंद्र, गीत: राजेंद्र कृष्ण) खास है। इसके गीत और उनके बोल यूट्यूब पर हैं। गीतों को स्वर दिया है, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, मन्ना डे तथा कोरस ने। लय, तान, भाव भरे इन गानों में प्रार्थना है, देशभक्ति और अनुरोध।
गीत है, ‘सोने की जहां धरती, चांदी का गगन है’ इस गीत में वायलिन का खूबसूरत प्रयोग हुआ है। ‘छोड़ भी दे आकाश सिंहासन... फिर धरती पर आजा रे...’ गीत के अंत में भगवद् गीता का श्लोक ‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्युत्थानम् अधर्मस्य तदात्मानम् सृजाम्यह।’ आता है। अन्य गीत हैं, ‘रो रो के दिल पुकारे रो रो के दिल पुकारे, ढूंढे तेरे इशारे ढूंढे तेरे इशारे...’, ‘आंख रोई मगर मुस्कुराना पड़ा...दिल के टुकड़े हुए फिर भी आना पड़ा...’, ‘ओ तेरे साथ साथ मेरी दुनिया भी जा रही है...’, ‘ओ चांद मुझ को जरा ये बता’, ‘देखो जी देखो आंख से आंख लड़ी...’।
फिल्मों में ‘कालापानी’ की दृश्य
2011 की मलयालम फिल्म है, ‘अगस्त 15’। साजी कैलास की इस फिल्म को एस.एन. स्वामी ने लिखा है। मम्मूटी ने क्राइम ब्रान्च ऑफिसर की प्रमुख भूमिका निभाई है। 1958 में हिन्दी में ‘कालापानी’ नाम से फिल्म बनी थी, जिसमें देव आनंद, मधुबाला, नलिनी जयवंत ने भूमिकाएं कीं। 1996 में बनी मलयालम सफल फिल्म ‘कालापानी’ (निर्देशक: प्रियदर्शन, संगीत: इलईराजा) गुलामी के दौरान न मालूम कितने लोगों को कालापानी की सजा की कहानी दिखाती है।
कालापानी मतलब अंदमान द्वीप के सेलुलर जेल में सड़ा देना। इस स्थान पर भारतीय कैदी मेहनत करते हैं और अंग्रेज मौज-मस्ती। इनमें अधिकतर राजनैतिक कैदी हुआ करते थे, जिन्हें झूठे मुकदमे में फंसा कर कालापानी की सजा दी जाती थी।
‘कालापानी’ 1915 के ब्रिटिश इंडिया में डॉक्टर गोवर्धन मेनन (उन्नी) को ट्रेन में बम फेंकने के झूठे आरोप में गिरफ़्तार करके पोर्ट ब्लेयर के सेलुलर जेल भेज दिया जाता है। 1965 में भारतीय सेना का ऑफिसर सेतु अपनी ऑन्ट (बुआ) पार्वती के पति डॉक्टर गोवर्धन मेनन के विषय में पता करने कालापानी जाता है। पता चलता है कि गोवर्धन राष्ट्रवादी था, जिसे उसकी शादी के दिन गिरफ़्तार कर सेलुलर जेल भेज दिया गया था।
एक आइरिस जेलर डेविड बेरी (एलेक्स ड्रैपर) बहुत दुष्ट है, इंग्लिश डॉक्टर लेन हटन दयालु है। 14 लोगों की रिहाई का आदेश आता है, पर जेलर मिर्जा खान (अमरीश पुरी) जेल से भागने के नाम पर कैदियों को मार डलवाता है। बदले में गोवर्धन जेलर तथा मिर्जा को मार डालता है। गोवर्धन का क्या हुआ, सेतु अपनी ऑन्ट को क्या बताता है, यह सब आप स्वयं देखें।
गाथात्मक फिल्म में तब्बू के अलावा अन्नु कपूर (वीर सावरकर), टीनू आनंद (कैदी) भी नजर आते हैं। गोवर्धन मेनन की मुख्य भूमिका में मलयालम के प्रसिद्ध और लोकप्रिय अभिनेता मोहनलाल हैं। तब्बू ने पार्वती नाम से पहले उनकी प्रेमिका और बाद में उनकी पत्नी की भूमिका की है। इनके अलावा फिल्म में नेदुमुड़ी वेणु (डॉक्टर के मामा), श्रीनिवासन (कैदी, जेलर का जासूस), विनीत (इंडियन आर्मी ऑफ़ीसर सेतु) हैं।
पांच गीतों वाली इस फिल्म का एक गीत, ‘वंदे मातरम’ जावेद अख्तर ने लिखा है, बाकी के गीत अरिवुमति के हैं। चित्रा एवं श्रीकुमार ने गीतों को स्वर दिया है। उत्कृष्ट सिनेमाटोग्राफी संतोष शिवन की है। फिल्म की हिन्दी, तमिल, तेलगू डबिंग हुई है। मलयालम फिल्म में हिन्दी, इंग्लिश, तमिल, बांग्ला, तेलगू तथा जर्मन भाषा का प्रयोग हुआ है।
हिन्दी में यह ‘सजा-ए-कालापानी’ नाम से डब हुई, जिसमें अमिताभ बच्चन कथावाचक हैं। तेलगू में ‘कालापानी’ नाम रखा गया। सेल्वी की कोरियोग्राफी आकर्षक है। खासकर तब्बू को प्रसन्न मुद्रा मे नृत्य करते देखना सुखद लगता है।
26 जनवरी 2023 के गणतंत्र दिवस पर कुछ फिल्मों-गीतों के माध्यम से देशवासियों को मेरा सलाम!
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