फिल्म- ‘द लैंड हैज आइज’
भारतीय फिल्में यहां खूब दिखाई और पसंद की जाती हैं। फिजी की अपनी पहली फीचर फिल्म 2004 में बनी, जिसका नाम है, ‘द लैंड हैज आइज’, इसके निर्देशक विल्सोनी हेरेनिको हैं। डेढ़ घंटे की इस फिल्म में एक युवती विकी (सैपेटा टैटो) यौद्धा स्त्री (रेना ओवेन) के मिथ से प्रेरित हो कर न्याय तथा स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करती है। यह व्यक्ति के किशोरावस्था से प्रौढ़ होने की कहानी है। सैपेटा यहीं की पैदाइश हैं और यह उनकी पहली फिल्म है। इसकी थीम फिजी की है। यह पूरी तरह से यहां की फिल्म है।
2006 में ‘द फाल’ नामक एक फिल्म का फिल्मांकन यहां हुआ। इस करीब दो घंटे की फिल्म में बिस्तर से लगा एक मरीज एक उजाड़ टापू पर एक लड़की से नायकों, मिथ, खलनायकों की कहानी सुनता है। 2016 में डेढ़ घंटे की डॉक्यूमेंट्री ‘एम्ब्रैस’ बॉडी इमेज एक्टिविस्ट टैरिन ब्रुमफिट की कहानी है। वह इस वैश्विक मुद्दे पर युद्ध स्तर पर कार्य करती है।
लेकिन इन सबके पहले फीजी में 2002 में फीचर लेंथ की एक डॉक्यूमेंट्री ‘रील पैराडाइज’ नाम से बनी। यह अमेरिकन पियर्सन परिवार के विषय में है, जो एक साल फिजी में रहता है। जाहिर-सी बात है, उसका स्थानीय लोगों से संबंध होता है। इस फिल्म को ‘ए रॉ स्लाइस ऑफ फिजियन लाइफ’ की संज्ञा दी जाती है। ‘रील पैराडाइज’ इंडिपेंटेंट फिल्म वैतेवो टापू में बनी है।
यह पहली फिल्म है जिसमें फिजी का लैंडस्केप पूरी फिल्म की पृष्ठभूमि में है। वैसे तो यह पियर्सन परिवार की एक साल की कहानी है लेकिन फिल्म बनाने वाले फिजी जीवन और संस्कृति की जटिलताओं को समझने का चित्रण भी करते हैं।
वे एक साल फिजी के सुदूर टापू में रहते हैं और रहवास समाप्त होने के समय 180 मेरिडियन सिनेमा चलाते हैं जिसके द्वारा वे स्थानीय लोगों को मुफ्त सिनेमा दिखाते हैं।
जॉन पियर्सन इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर हैं जिन्होंने अपनी पत्नी जेनेट के साथ मिल कर आईएफसी बनाया है। वे अपने बच्चों को भी न्यूयॉर्क सिटी से भिन्न अनुभव देना चाहते थे। विदा बेला में ग्रामीणों द्वारा आयोजित समारोह में परिवार पालथी मार कर बैठता है और स्थानीय पेय कावा पीता है।
बैरी बर्क्ले ने ‘फोर्थ सिनेमा’ नाम से एक पद का निर्माण किया। उनके अनुसार देशज लोगों द्वारा देशज लोगों के लिए बनाया गया देशज सिनेमा इस श्रेणी के अंदर आता है। उनके अनुसार प्रत्येक संस्कृति का यह अधिकार और दायित्व है कि वे अपनी संस्कृति अपने लोगों के समक्ष प्रस्तुत करें।
यह ऐसा दायित्व है जिसे बाहरी लोगों के हाथ में नहीं दिया जा सकता है, न ही उनके अनाधिकार ग्रहण केलिए छोड़ा जाना चाहिए। बैरी बर्कले की बात से इत्तिफाक रखते हुए अब फिजी के लोगों ने अपना सिनेमा खुद बनाने की ठानी है। इंतजार है, भविष्य में फिजी से आने वाली फिल्मों का।
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