भगत सिंह के जीवन की सबसे बड़ी घटना तब हुई जब 30 अक्तूबर 1928 को लाहौर में लाला लाजपत राय के नेतृत्व में सायमन कमीशन का विरोध किया गया।
- फोटो : Amar Ujala
लाहौर में उन्होंने नई रणनीतियों पर काम किया और फिर दिल्ली आकर दैनिक अर्जुन समाचार पत्र में काम करने लगे। वहां उनका परिचय हुआ बटुकेश्र्वर दत्त, अजय घोष, विजयकुमार सिन्हा और योगेश चन्द्र चटर्जी से, अपने इन्हीं साथियों के साथ मिलकर भगत सिंह ने 1923 में स्थापित हुए हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन को दोबारा खड़ा करने का बीड़ा उठाया और आखिरकार हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन की स्थापना कर डाली। देश के युवाओं को आजादी की लड़ाई के लिए तैयार करना हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन का मकसद था।
भगत सिंह के जीवन की सबसे बड़ी घटना तब हुई जब 30 अक्तूबर 1928 को लाहौर में लाला लाजपत राय के नेतृत्व में सायमन कमीशन का विरोध किया गया, जिसमें पुलिस अधीक्षक स्कॉट ने सहायक पुलिस अधीक्षक सांडर्स को लाठी चार्ज की अनुमति दी हुई थी। इस लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिसके बाद 17 नवम्बर 1928 को वह वीरगति को प्राप्त हो गए। इस घटना से भारत के क्रांतिकारियों के रक्त में ज्वाला का उदघोष हो रहा था, जिसके बाद भगत सिंह,चंद्रशेखर आजाद,राजगुरु और जयगोपाल ने इसका बदला लेने का निर्णय लिया और स्कॉट की हत्या का प्लान बनाया लेकिन उन्होंने स्कॉट को नहीं बल्कि सांडर्स को गोली मार दी।
ब्रिटिश सरकार में इस घटना के बाद खलबली मच गई। इस घटना के बाद कई महीनों तक भगत सिंह और उनके साथी फरार रहे, लेकिन क्रांति की ज्वाला रुकने वाली कहां थी। अप्रैल 1929 में भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव ने सोई हुई ब्रिटिश सरकार को जगाने के लिए कोलकाता असेम्बली में कम तीव्रता वाले बम फेंककर नारेबाजी की और अपनी गिरफ्तारी दी, जिसके बाद उन पर सांडर्स की हत्या का मुकदमा चलाया गया।
23 मार्च 1931 को 7 बजकर 33 मिनट पर भगत सिंह को उनके साथी राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दे दी गई। ब्रिटिश सरकार ने ये कृत्य कर तीन क्रांतिकारियों की सांसो को तो छीन लिया परन्तु उनके द्वारा प्रसारित क्रांति के विचारों का पतन वो नहीं कर पाई। आज भी हमारे बीच भगत सिंह के विचारों का प्रवाह है, जो अन्याय के खिलाफ और राष्ट्र के प्रति समर्पण के भाव को जगाता है। भारत की यह धरा धन्य है की उसने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।