युवराज सिंह के लिए साल 2011 जितना सफल रहा था, उतना ही दुखदायी भी। ये वो साल था जब वो कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और भारत के वर्ल्ड कप जीतने में सबसे सफल भूमिका निभाई।
उस समय युवराज सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं जब इस बारे में सोचता हूं तो मुझे लगता है कि मेरे जीवन में अंग्रेजी के 'सी' शब्द की काफी अहम भूमिका रही है। मैं चंडीगढ़ में पैदा हुआ, मैं क्रिकेटर बना, दुनियाभर में एक क्रिकेटर के रुप में अपनी टीम के साथ कप के लिए लालायित रहा। अब अंग्रेजी का एक नया 'सी' शब्द फिर से मेरी जिंदगी में जुड़ गया है, जिसका नाम कैंसर है'।
हालांकि बाद में वो कैंसर से तो जंग जीत गए, लेकिन उसकी वजह से उनके करियर पर जरूर लगाम लग गया। अब जब चूंकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का मौका ही नहीं दिया जा रहा तो उनके लिए सबसे बेहतर था संन्यास ले लेना, जो उन्होंने अब किया। खैर... उनके 6 छक्के और 12 गेंद में 50 रन हमेशा लोगों को याद रहेंगे, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।