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पिता के नाम पहला खत: आज तक सिखाई हर बात के लिए शुक्रिया

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हैप्पी फादर्स डे - फोटो : सोशल मीडिया
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डियर पापा, 

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पहली बार आपको खत लिख रही हूं। आपको बताने के लिए बहुत कुछ है जो सामने कभी नहीं कह पाई वो लिखकर शायद अच्छे से कह पाऊंगी। मैं जो कुछ लिखूंगी उससे शायद कहीं ना कहीं मेरे जैसी कई बेटियां भी सहमत होंगी क्योंकि हम सब जीवन के समान पड़ाव से गुजरते हैं फर्क सिर्फ अनुभव का होता है। 

मैं आपसे उतनी करीब नहीं हूं जितनी मां से लेकिन जब कभी उलझन में रहूंगी तो शायद सबसे पहले आपके पास आऊंगी क्योंकि आप मुझे बेहतर समझ पाएंगे। ऐसा इसलिए कह रही हूं क्योंकि आप एक अच्छे पिता तो हैं ही लेकिन एक अच्छा दोस्त बनने की शुरुआत उसी दिन कर दी थी जब दीदी को शहर से बाहर पढ़ने भेजा था। उसके बाद मुझे भी मेरे मन मुताबिक काम करने की आजादी दी। छोटे शहर से बड़े शहर में लड़कियों को अकेले भेजने का डर तो था ही और कही-सुनाई बातों से जल्दी प्रभावित हो जाना आपकी एक कमी है, खैर कमी हर इंसान के अंदर होती है, हम उन्हें सुधारते कैसे हैं ये ज्यादा मायने रखता है।  हम दोनों बहनों को हर मौका देकर आपने कई दकियानूसी सोच वाले मुंह बंद किए। सबसे पहले इसके लिए शुक्रिया! 
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मैंने जबसे होश संभाला है, तबसे आजतक आपको बहुत संघर्ष करते देखा है; जैसे आपके जीवन में इतने उतार-चढ़ाव आए वैसे ही हमारे रिश्ते भी कई उतर-चढ़ाव से गुजरे, लेकिन उस समय के पापा और अब के पापा में से मैं आज के पापा को चुनूंगी। आपमें आया बदलाव बहुत अच्छा है पापा, ऐसे ही रहिएगा। 

आप बेशक हमेशा से मुझे समझते होंगे लेकिन कभी जाहिर नहीं किया इसलिए मैंने भी आपको अच्छा नहीं समझा। आज जब आप खुलकर अपनी बात जाहिर करते हैं, हर विषय पर चर्चा करते हैं, कोई भी फैसला लेने से पहले मेरी राय पूछते हैं तो अच्छा महसूस होता है। आप जितना ज्यादा गुस्सा करते हैं उससे कहीं ज्यादा प्यार भी करते हैं और ये बात जाहिर नहीं भी करेंगे तो मैं समझती हूँ। 

मुझे याद है आप बचपन में कैसे मुझे स्कूल के लिए तैयार करते थे। मेरे बड़े होने तक भी स्कूल और ट्यूशन तक मुझे लेने और छोड़ने जाया करते थे। ये स्पेशल ट्रीटमेंट सिर्फ मेरे लिए था..घर के और बच्चों को 'सेल्फ डिपेंडेंट' बनने की सलाह दी जाती थी। उस समय आपका ऐसा करना मुझे गुस्सा दिलाता था, लगता था आप मुझपर निगरानी रख रहे हैं और मेरी आजादी छीन रहे हैं। अब समझ आता है कि मेरे कमी को समझ चुके थे और जिंदगी में आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग अपने तरीके से दे रहे थे, आखिर पिता जो हैं। तब मैं काफी डरपोक किस्म की हुआ करती थी। मुझे आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी आपका शुक्रिया!

आपकी स्कूटर से लेकर कार तक सबसे ज्यादा मैंने आपके साथ सफर तय किया है। .याद है, ग्रेजुएशन का आखिरी एग्जाम दिलाकर लौटते वक्त अपने मुझसे पूछा था, अब रेल किस दिशा में जाएगी यानी आगे क्या करोगी? मैंने कहा था, 'जर्नलिज्म'। फिर आपने कहा था, 'वाह फिर तो मैं गाड़ी पर प्रेस लिखवाऊंगा।' अभी उपलब्धि बहुत छोटी ही सही लेकिन आज मेरे पास प्रेस कार्ड है पापा! जिसे पाने में आपका बहुत योगदान है। मुझ पर विश्वास करने के लिए भी आपका शुक्रिया!

आप एक बहुत अच्छे वक्ता हैं और बहुत अच्छे आलोचक भी हैं। आपकी सिखाई हर बात अबतक के सफर में बहुत जगह काम आई और आपने मेरी जितनी आलोचना की है उससे मुझे कई बार बहुत दुख हुआ लेकिन आखिर में आपकी आलोचना ने भी कभी ना हारना और ना हताश होना सिखाया है। इतना मजबूत और सक्षम बनाने के लिए भी शुक्रिया!

आपकी समझ, परख, सोच और स्वाभाव से मैं बहुत प्रभावित हूं पापा। हालांकि, आपके जैसे कम ही गुण हैं मेरे अंदर, आप बहुत अच्छे और नेक इंसान हैं पापा। अभी आपसे बहुत कुछ सीखना और बांटना बाकि है। जिंदगी की हर अच्छी और अनोखी सीख देने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया!

आशा करती हूं मैंने आपको शिकायत के कम मौके दिए हों। आपका मान रखा है और रखूंगी। इस पहले खत के जरिए आखिर में एक अहम बात कहूंगी, जिंदगी एक ही है और बहुत छोटी भी उम्मीद करती हूं कि एक अच्छे पिता और दोस्त होने के नाते आपका वो दरवाजा हमेशा मेरे लिए खुला रहेगा जहां जब चाहे आकर मैं आपसे बेझिझक अपनी बात कह सकूं और आप समझ सकें।

आपकी 
पंखुड़ी 

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