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Happy Father's Day 2019: पिता का खत बेटे के नाम, तुम्हें चलायमान होना है, गति की होड़ करने वाला नहीं

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हैप्पी फादर्स डे - फोटो : सोशल मीडिया
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बेटे विधान के लिए एक पाती..!
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जीवन प्रकाशमान हो, प्रकाश की तरह गति वाला ना हो बेटे..! प्रेक्षित दिशा यथार्थ की दिशा नहीं होती। अनुमान की गणना। हम दिशाओं के बीच दिशाओं के कोण में रहते हैं। तकरीबन 19 मील प्रति सेकेंड से सूर्य के चक्कर लगाती पृथ्वी पर।  आभास के बीच यथार्थ और यथार्थ के बीच आभास। धर्म की माया और दर्शन में मिथ्या। बड़ा रोचक फैलारा है बेटे। लेकिन है अद्भुत..!

प्रतिस्पर्धाओं की कहानियां, बहुत कुछ हो जाने वाली इच्छाओं की आवाजें, तेजी से आगे बढ़ने की बेचैनी और महत्वकांक्षाओं की हलचल। यहां सबकुछ स्पीड में है। जल्दी सोना है, जल्दी उठना है, फटाफट खाना है, लौटना है तेजी से, मिलना है तेजी से और पार होना है शीघ्रता से।
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हैप्पी फादर्स डे - फोटो : सोशल मीडिया
मैं अक्सर तुमसे कहता हूं कहां पहुंचना है? किसके लिए बनना है? क्या होना है और क्यों होना है? यहां एक लय व्याप्त है। एक रिदम, पृथ्वी और सूर्य के बीच, ग्रहों और ब्रह्मांड के बीच। हम उस लय में रहें। घटते रहें। आरोपण से दूर। मंथर। लय के साथ, गति से नहीं। तुम्हें चलायमान होना है गति की होड़ करने वाला नहीं।

किरणों और तरंगों की दुनिया के पार कौन गया है। रेडियो तरंग हो गामा किरणें हों या फिर प्रकाश किरणें, ब्रह्मांड में इनकी गति का कोई क्या सानी होगा। लेकिन वेग है तो ठीक है लेकिन परिमित भी है। मापा तो जा सकता है। 2 लाख से ज्यादा प्रति सेकेंड का घूमता हुआ हिसाब। इस अनंत असीमित ब्रह्मांड में सबकुछ परिमित भी तो है।


पृथ्वी देखी, सूरज देखा, सौर मंडल, आकाशगंगाएं, आकाशगंगाओं का समूह और उसके बाद असंख्य तारों के बीच आभास, ये और है अनंत है असीमित है। आश्चर्य के महासागर में डूबा हुआ। सभ्यताओं ने जिज्ञासा से जाना और जानने से समझा और अनंत के बीच क्षुद्रता का बोध हुआ।

बोध में सबकुछ है. स्थिर और धीर..!
तुम लय में और बोध में रहना
बाकी जो होना है हो जाना..! 
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