फ़हद फ़ासिल ने जिस तरह से ‘हैप्पी लकी गो फ़ेलो’ का अभिनय किया है, वह ‘बुक ऑफ़ जॉब’ के अलोसी से बहुत भिन्न है।
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परिस्थितिवश उसे एक गांव की लड़की से उसकी शादी करनी पड़ती है। उसे असली नेकलेस की जगह नकली नेकलेस रखने में, मरीज को जरूरत से ज्यादा मॉर्फ़ीन देने में कोई हिचक नहीं... आगे आप खुद देखें।
फ़हद फ़ासिल ने जिस तरह से ‘हैप्पी लकी गो फ़ेलो’ का अभिनय किया है, वह ‘बुक ऑफ़ जॉब’ के अलोसी से बहुत भिन्न है। इससे उनकी अभिनय क्षमता की विस्तृत सीमा का पता चलता है। 2013 में यूथ आइकॉन का पुरस्कार जीतने वाले फ़हद को इस फ़िल्म के लिए पुरस्कार मिला तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
सच्ची घटना पर आधारित, स्त्री केंद्रित फ़िल्म ‘टेक ऑफ़’ में मनोज के रूप में फहद की एंट्री फ़िल्म में काफ़ी बाद में होती है। लेकिन आते ही वे कहानी का केंद्र बन जाते हैं। यहां उनकी चाल, बैठने-बोलने का अंदाज फ़िल्म के किरदार को जीवंत कर देता है। 2014 में एक बार फ़िर वो अपने ब्रूडिंग किरदार में लौटते हैं, जहां संवाद से अधिक उनकी आंखें बोलती हैं। ‘बैंगलोर डेज़’ के दास की उदास-विचारमग्न आंखों का राज फ़िल्म में बहुत बाद में खुलता है।
अतीत के मस्तमौला, चुलबुला, सफ़ल और वर्तमान में चुप्पा दास यानि दो भिन्न स्वभाव के चरित्र को निभाना सरल नहीं होता है। फ़हद ने दोनों रूप सफ़लतापूर्वक निभाए हैं। मुख्य पात्र न होते हुए भी फ़हद इस फ़िल्म को अर्थवत्ता प्रदान करते हैं और एक बार फ़िर वे पुरस्कार के हकदार बनते हैं।
‘बैंगलोर डेज’ में उनकी पत्नी की भूमिका में हैं, मलयालम सिनेमा की अभिनेत्री नज़रिया नज़ीम। दोनों ने पहले भी ‘प्रमाणी’ में संग काम किया था। ‘बैंगलोर डेज’ में काम करते हुए दोनों नजदीक आए और परदे के पति-पत्नी जीवन में पति-पत्नी बन गए। दोनों ने एक और फ़िल्म ‘ट्रांस’ में भी साथ-साथ में काम किया है।
आश्चर्य होता है अलोसी और दास की मासूम, निष्पाप आंखों को चालाकी-दुष्टता भरी आंखों में परिवर्तित होते देख कर। ‘22 फ़ीमेल कोट्टयम’ के सिरिल को अपराध करने में कोई हिचक नहीं है, अपने फायदे के लिए किसी भोली-भाली लड़की को ड्र्ग पेडलिंग के लिए उपयोग करने में उसे कोई शर्म नहीं है।
गंदे तरीके से वह अपने फ़ायदे के लिए लोगों का खूब दुरपयोग करता है। यहां उसकी आंखें दुष्टता का पर्याय हैं, बड़ा-से-बड़ा अपराध करते हुए वे निर्लिप्त रहती है। दर्शक की आंखें फहद की आंखों से हटती नहीं हैं। ‘जोजी’ में जोजी के रूप में केंद्रीय पात्र बन फ़हद एक बार फ़िर आदमी के श्याम पक्ष को प्रस्तुत करते हैं और अपनी छाप डालते हैं। दुष्ट पिता और भाइयों को रास्ते से हटाने में जोजी को कोई संकोच नहीं होता है, आखीर उसमें भी वही दुष्ट खून बह रहा है।
‘जोजी’ फ़िल्म के ऑफ़ीसियल पोस्टर में फ़हद फ़ासिल का पूरा चेहरा दिखाया गया है जिसमें उनकी एक आंख उन्होंने अपने हाथ से ढ़ंकी हुई है, मात्र एक आंख नजर आ रही है। अभिनेता की एक आंख दर्शकों को फ़िल्म की ओर आकर्षित करने के लिए काफ़ी है। बिना किसी व्याख्या के ऐसे अभिनेता का चेहरा पोस्टर पर दिखाना, उसकी प्रसिद्धि का गवाह है। आप इस अभिनेता की फिल्में देखें, अपने आप फहद फासिल की बोलती आंखों और उनके अभिनय के मुरीद हो जाएंगे।
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