कोरोना के खिलाफ सिक्किम की लड़ाई कामयाब रही है।
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इन ऐहतियाती उपायों का ही नतीजा है कि राज्य में 20 अप्रैल से ही लॉकडाउन में काफी हद तक ढील दे दी गई है और तमाम सरकारी दफ्तर खुल गए हैं। हालांकि बाहर निकलने वालों के लिए मास्क और मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु एप्प अनिवार्य कर दिया गया है।
वाहन चालकों को भी परमिट उसी स्थिति में मिलेंगे जब उनके पास आरोग्य सेतु व मास्क हो और वे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करें। बीते साल मार्च में राज्य में 1.18 लाख पर्यटक आए थे। ऐसे में सीमाएं सील करने का फैसला आर्थिक तौर पर बेहद नुकसानदेह था, लेकिन बावजूद इसके सरकार ने यह फैसला करने में देरी नहीं लगाई।
सिक्किम के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. पेम्पा शेरिंग भूटिया बताते हैं कि पड़ोसी कालिम्पोंग में एक महिला के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना मिलते ही सरकार ने उस महिला के साथ चेन्नई से एक ही विमान से लौटने वाले 12 यात्रियों का तत्काल पता लगाकर उनको होम क्वांरटीन में भेज दिया।
बाहर से आने वाले तमाम लोगों का पता लगाकर उनको क्वारंटीन में भेजा गया। ऐसे लोगों के बारे में सूचना देकर जागरुक नागरिकों ने भी सरकार की मदद की। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग बताते हैं कि जनवरी में चीन में कोरोना का संक्रमण फैलने और इसके पड़ोसी देश नेपाल तक पहुंचने के बाद सिक्किम ने चीन से लगी नाथूला सीमा को फौरन सील कर दिया था।
इसके साथ ही नेपाल से लगी खुली सीमाओं को भी बंद कर दिया गया। सिर्फ पश्चिम बंगाल से लगी दो सीमा चौकियों रंग्पो और मल्ली को खुला रखा गया था। वहां से भी राज्य के लोगों को लौटने और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन की ही अनुमति दी गई थी। बाहर से आने वालों को जांच के बाद होम क्वारंटीन में भेज दिया गया था।
वैसे, राज्य के लोग भी केंद्र की ओर से घोषित लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का सख्ती से पालन कर रहे थे। मुख्य सचिव एस.सी.गुप्ता कहते हैं कि राज्य के लोग 17 मार्च से ही घरों में रह रहे थे। अब तक तमाम नमूनों के नेगेटिव आने के बाद कहा जा सकता है कि कोरोना के खिलाफ सिक्किम की लड़ाई कामयाब रही है।
वह बताते हैं कि तीन मई के बाद जब लॉकडाउन हटता है, देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले सिक्किम के लोगों की वापसी आसान नहीं होगी। उनको कड़ी जांच से गुजरना होगा। उससे पहले ऐसे तमाम लोगों को आरोग्य सेतु पर पंजीकरण करना होगा।
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