चीन की एसएआईसी मोटर कॉर्प ने 2017 में गुजरात में दो हजार करोड़ रुपए की लागत से अपना संयंत्र शुरू किया- सांकेतिक तस्वीर
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गौर करने की बात है कि मुंबई और तूती कोरिन-जैसे बंदरगाहों में सुरक्षाकारणों से चीनी निवेश की इजाजत नहीं है जबकि मुंद्रा पोर्ट के मामले में ऐसी चिंताओं को दरकिनार कर दिया गया। इसका क्या कारण था ये आज तक भारत की जनता के सामने खुलासा नहीं हुआ।
यह सब इसलिए हो रहा था ताकि चीनी निवेश से गुजरात विकास का सुपर मॉडल बन जाए। हर साल होने वाले वाईव्रेंट गुजरात कान्फ्रेंस में चीनी निवेश बढ़ने लगा। 2007 के बाद हर साल MOU साइन होने लगे।
गुजरात में टाटा मोटर्स की नैनो कार का प्रोजेक्ट भले नहीं चल पाया पर ‘मॉरिस गराज’ नाम की जिस ब्रिटिश कंपनी ने एमजी 'हेक्टर' नाम से कार लांच की है उसका प्लांट कामयाब रहा। यह केवल नाम भर की ब्रिटिश कंपनी थी। इसमें अधिकतर निवेश चीन का है।
चीन की एसएआईसी मोटर कॉर्प ने 2017 में गुजरात में दो हजार करोड़ रुपए की लागत से अपना संयंत्र शुरू किया और 2019 में वहां से बन कर एमजी हेक्टर गाड़ी बाजार में आ गई।
इसके पीछे- पीछे चीन की अनेक ऑटोमोबाइल कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं और यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि जल्दी ही जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और अमेरिकी कंपनियों को पीछे छोड़ कर चीन की ऑटोमोबाइल कंपनियां भारत के बाजार पर कब्जा कर लेंगी।
इसी तरह चीन की एक बड़ी स्टील कंपनी ने गुजरात के धोलेरा में 21 हजार करोड़ रुपए का संयंत्र लगाने का ऐलान किया। इस संयंत्र में उत्पादन शुरू हो गया तो यह देश की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बन सकती है।
चीन की कंपनियां गुजरात, महाराष्ट्र में टेक्सटाइल और औद्योगिक पार्क बनाने की तैयारी कर रही हैं। संचार से लेकर बुनियादी ढांचे के विकास तक के काम में चीन की कंपनियों को मंजूरी देकर उन्हें शामिल किया गया है।
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