आईटी एक्सपर्ट के अनुसार बुली बाई ऐप माइक्रोसॉफ्ट के ओपन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट साइट गिटहब पर बनाया गया था।
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क्या थी आखिर पूरी प्रक्रिया?
नीलामी का लिंक ट्विटर पर फर्जी अकाउंट @giyu44 के नाम से अपलोड किया जाता था। ये काम 24 घंटे चलता था और इसके लिए वॉयस कॉल से भद्दे कमेंट भी किए जाते थे। इससे यूजर के पास भी नोटिफिकेशन पहुंच जाता था। नए यूजर भी ऑक्शन से जुड़ जाते थे। बोली लगाने वाले वॉयस कॉल से एक दूसरे से जुड़े होते थे।
बोली महिला की खूबसूरती के हिसाब से लगती थी। उसे बेइज्जत करने के लिए सर्वाधिक सुंदर महिला की सबसे कम बोली लगाई जाती थी। न्यूनतम बोली 1 से 2 पैसे तक की होती थी। इस गंदे खेल में ज्यादातर 20 से 25 साल के युवा शामिल थे। ये सभी अपनी पहचान छुपाने के लिए फर्जी आईडी बनाते थे। पुलिस अब इन लोगों को भी पकड़ रही है।
वैसे नीरज को मुगालता था कि उसने एप बनाने के लिए प्रोटोन मेल और वीपीएन जैसी टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है, इसलिए वो पकड़ में नहीं आएगा। अति आत्मविश्वास के चलते वह पुलिस को चैलेंज कर रहा था। अंतत: पुलिस की स्पेशल सेल ने ट्विटर पर जाल बिछाया और 6 जनवरी को वीपीएन ब्रेक कर उसे ट्रेस कर लिया।
आईटी एक्सपर्ट के अनुसार बुली बाई ऐप माइक्रोसॉफ्ट के ओपन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट साइट गिटहब पर बनाया गया था। नीरज ने गिटहब पर बुली बाई ऐप को नवंबर 2021 में डेवलप कर दिसंबर में अपडेट किया था। गिटहब में ऐप डेवलप करने के लिए मेल आईडी से लॉगिन करना होता है। मेल आईडी ट्रेस न हो इसके लिए नीरज ने स्विजरलैंड की कंपनी प्रोटोन से एन्क्रिप्टेड मेल आईडी, जिसे ट्रेस नहीं किया जा सकता। कंपनी भी इसे गोपनीय रखती है।
लेकिन यह मामला इकतरफा नहीं है। इसके पहले संदेश सेवा ‘टेलीग्राम’ पर एक विशिष्ट चैनल को सोशल मीडिया पर एक खास समुदाय के यूजर्स को चिन्हित किया गया। यह समुदाय हिंदू महिलाओं को निशाना बना रहा था, उनकी तस्वीरें साझा करने के साथ ही भद्दे कमेंट भी कर रहा था। केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार हिंदू महिलाओं को कथित तौर पर निशाना बनाने वाले एक टेलीग्राम चैनल को ब्लॉक कर दिया गया है।
अब ये सवाल बेमानी है कि इसकी शुरूआत पहले किसने की?
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बहरहाल, बुल्ली बाई ऐप मामले में मुंबई पुलिस के साइबर सेल ने उत्तराखंड से 19 वर्षीय युवती श्वेता सिंह और इंजीनियरिंग के छात्र मयंक रावल को तथा बेंगलुरू से सिविल इंजीनियरिंग के छात्र विशाल कुमार झा को गिरफ्तार किया है। श्वेता सिंह तो 12 वीं छात्रा है। उसके परिजनों का कहना है कि वो निर्दोष है, उसका अकाउंट हैक किसी ने यह ऐप बनाया है। सच्चाई क्या है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।
मुंबई पुलिस का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने वाले ‘बुली बाई’ ऐप के प्रचार में शामिल लोगों ने गुमराह करने के लिए ट्विटर हैंडल पर सिख समुदाय से जुड़े नामों का इस्तेमाल किया ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा हो। यह भी उजागर हुआ है कि युवाओं के मन में साम्प्रदायिक विद्वेष भरने के लिए कुछ राजनीतिक संगठनो द्वारा अत्यंत परिष्कृत ‘टैक फाॅग’ ऐप का उपयोग किया जा रहा है।
अब ये सवाल बेमानी है कि इसकी शुरूआत पहले किसने की? उन्होंने, जिन्होंने हिंदू देवीताओं पर अश्लील कमेंट शुरू किए या फिर उन्होंने, जो सुल्ली या बुली ऐप पर हिंदू विरोधी महिलाों की नीलामी या भद्दे कमेंट कर रहे थे? मुद्दा यह है कि जिसने भी यह निंदनीय सिलसिला शुरू किया, उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अगर कार्रवाई हो गई होती तो मामला इतना नहीं बिगड़ता।
धार्मिक विरोध, राजनीतिक असहमतियां अपनी जगह हैं, लेकिन इसकी आड़ में आस्था के बिंदुओं और नारी की अस्मत से खिलवाड़ की इजाजत तो नहीं दी जा सकती। यह ऐसा खतरनाक खेल है, जिसकी देश को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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