आगामी 25 सालों के मद्देनजर देश में बुनियादी अधोसंरचना को तेज करने के लिए बजट में पीएम गति शक्ति परियोजना का जिक्र एक अहम बिंदु है।
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बजट में पीएम गति शक्ति नामक राष्ट्रीय मास्टर योजना लॉन्च की गई है। इसके तहत देश में निर्बाध कनेक्टिविटी व लॉजिस्टिक दक्षता का प्रावधान है। किसान आंदोलन के मूद्दे नजर सरकार किसानों की समस्याएं हल करने की दिशा में सोच रही है। शायद इसीलिए बजट में ‘एक जिला एक उत्पाद’ की तर्ज पर ‘एक स्टेशन एक उत्पाद योजना’ की शुरुआत होगी। रेलवे छोटे किसानों और उद्यमों के लिए कुशल लॉजिस्टिक्स विकसित करेगा। ग्रामीण इलाकों के छोटे किसानों की मदद करने के लिए भारतीय रेलवे एक योजना तैयार करेगा।
बजट भाषण में वित्त मंत्री का मुख्य जोर ई शिक्षा, ई स्वास्थ सेवा, ई बैंकिंग पर दिखा। यह इस बात का संकेत है कि देश में डिजीटल लेन-देन तेजी से बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने देश में पहले डिजीटल विश्वविद्यालय की स्थापना का भी एलान किया।
आगामी 25 सालों के मद्देनजर देश में बुनियादी अधोसंरचना को तेज करने के लिए बजट में पीएम गति शक्ति परियोजना का जिक्र एक अहम बिंदु है। यह प्रोजेक्ट 107 लाख करोड़ रुपये का है, जिसके तहत रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को एक नए डिजीटल प्लेटफॉर्म के तहत लाया जाएगा, ताकि विभिन्न परियोजनाओं में पर्याप्त समन्वय हो। इस परियोजना के अंतर्गत अगले तीन सालों में 400 नई वंदे भारत ट्रेनें चलाई जाएंगी व 100 पीएम गति शक्ति कॉर्गो टर्मिनल भी तैयार किए जाएंगे।
इसके अलावा पूरे देश में समानों और लॉजिस्टिक की आवाजाही तेजी से हो सके इसके लिए पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान 2022-23 में तैयार किया जाएगा। नेशनल हाईवे के नेटवर्क को कुल 25 हजार किलोमीटर और बढ़ाया जाएगा। अगले साल 8 नए रोप वे पीपीपी मॉडल पर बनेंगे। देश में सप्लाई चेन के नेटवर्क बेहतर बनाने सरकार ‘वन प्रोडक्ट और वन सिस्टम’पर काम करेगी।
बजट में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की बात तो कही गई है, लेकिन महंगाई की मार से परेशान आम आदमी को राहत देने की कोई बात नहीं है।
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मुद्दों से अनछुआ लेकिन दूरगामी
हालांकि वित्त मंत्री किसानों की एक प्रमुख मांग एमएसपी गारंटी कानून बनाने की मांग पर कुछ नहीं कहा, लेकिन इस साल किसानों को रबी व खरीफ में गेहूं व धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में 2.37 लाख करोड़ रुपये के भुगतान का उल्लेख किया। साथ ही किसानों को उनकी उपज का दाम सीधे उनके खाते में जमा करने का भी ऐलान किया। इससे आढ़तिया प्रथा बंद होगी। बजट में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की बात तो कही गई है, लेकिन महंगाई की मार से परेशान आम आदमी को राहत देने की कोई बात नहीं है।
इस बार बजट में सहकारी समितियों को छोड़कर बाकी किसी क्षेत्र को खास कर राहतें वित्तमंत्री ने नहीं दी हैं। इस दृष्टि से सर्वाधिक निराशा मध्यम व वेतन भोगी वर्ग को हुई है, जिसे आयकर में राहत और स्टैंडर्ड डिडक्शन में छूट बढ़ने की उम्मीद थी। दरअसल सरकारी, अदर्ध सरकारी वेतनभोगी वर्ग अब दोहरी मार पड़ेगी।
राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत अब केन्द्र व राज्य के सरकारी कर्मचारियों का योगदान बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया गया है। इससे ‘टेक होम सेलेरी’ घटेगी तो दूसरी तरफ इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं मिलेगी। अर्थात उसकी खर्च करने की क्षमता कम होगी। जबकि आज अर्थव्यवस्था को तेज करने ज्यादा खर्च की जरूरत है।
कुल मिलाकर वित्त मंत्री ने तुष्टिकरण के बजाए आर्थिक विकास के मुख्य कारकों को त्वरण देने पर ज्यादा जोर दिया है। यह मानकर कि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तो देश में चहुमुंखी विकास होगा। कर राजस्व बढ़ेगा तो पूंजी निवेश भी बढ़ेगा। पूंजी निवेश बढ़ेगा तो रोजगार के अवसर स्वत: पैदा होंगे। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो गुणवत्ता भी बढ़ेगी। यही इस बजट का निहितार्थ है।
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