ब्रिटिश राजनीति में दक्षिण एशियाई उम्मीदवारों का उभरना काफी दिलचस्प है और देश के राजनीतिक इतिहास में एक बड़े बदलाव को दिखाता है।
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अगर प्रधानमंत्री बने तो भारत के लिए क्या?
ब्रिटेन का प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका फैसला सितंबर के पहले हफ़्ते में होगा लेकिन भारतीयों की नजर ऋषि सुनक पर बनी है। ऐसा माना जा रहा है कि सुनक के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में और मजबूती आएगी।
ऐसा नहीं है कि सुनक भारतीय मूल के पहले ऐसे शख्स होंगे जो देश के शीर्ष पर पर पहुंचेंगे। इससे पहले मॉरीशस, त्रिनिदाद और टोबैगो, आयरलैंड और सशेल्स जैसे कई देश हैं जहां के राष्ट्राध्यक्ष भारतीय मूल के रहे हैं।
सुनक ने जिस हिसाब से चीन को आड़े हाथों लिया है उससे कहीं न कहीं इस भरोसे को बल ही मिला है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय मूल का होने की वजह से भारत के लिए वे थोड़ा नरम रवैया अख्तियार करें। भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर हाल में दिए गए बयानों से लगता है कि उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आएगी और आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच रिश्ते को भी मजबूती मिलेगी।
हालांकि, यह समझना ज़रूरी है कि व्यापार, द्विपक्षीय समझौतों पर होता है और इसमें कोई भी देश पहले अपना फायदा देखता है। इसलिए भारत के फायदे की बात करना अतिशयोक्ति ही होगी।
गौरतलब है कि भारतीय मूल के राजनेताओं को पहले घरेलू ऑडियंस को खुश करना होता है न कि भारतीयों को। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस को लिया जा सकता है, जहां उनका मकसद अमेरिकी लोगों को खुश करना होता है। उन्हें इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि इसका असर भारतीयों पर क्या होगा।
ब्रिटिश राजनीति में दक्षिण एशियाई उम्मीदवारों का उभरना काफी दिलचस्प है और देश के राजनीतिक इतिहास में एक बड़े बदलाव को दिखाता है। जानकारों की मानें, तो अभी भी ब्रिटेन नॉन व्हाइट पीएम के लिए तैयार नहीं है और ऐसे में सुनक का पीएम बनने के ख्वाब अधूरा रह सकता है। भारतीय मूल के लोगों के स्थानीय सरकार में शामिल होने से सामरिक साझेदार बनने में आसानी हो सकती है जैसा कि मॉरीशस के मामले में देखा जा सकता है।
हालांकि, हर मामले में ऐसा नहीं होता है। मलेशिया के मामले में ठीक इसके उलट हुआ। वहां जब नजीब अब्दुल रजाक जैसे स्थानीय मलय शख्स प्रधानमंत्री थे तब भारत के संबंध बेहतर थे और भारतीय मूल के महातिर मोहम्मद के साथ संबंध जटिल रहे।
यही वजह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाइट पीएम से डील करना भारत के लिए आसान हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ़ हो पाएगा कि ब्रिटेन का कमान किसके हाथ जाता है और अगर ऋषि सुनक यह कमान संभालते हैं, तो भारत को लेकर उनका रवैया कैसा होगा।
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