हमास के हमले के बाद आज पूरी दुनिया इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर देख रही है। इस यहूदी राष्ट्र पर हुए अब तक के जघन्यतम हमले के बाद आखिर उनके दिमाग में चल क्या रहा है? बेंजामिन नेतन्याहू के उदय को समझना, उनके राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और नेतृत्व की उनकी शैली को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। इस्राइल के इस प्रधानमंत्री की जड़ें न केवल उनके व्यक्तिगत अतीत की झलक देती हैं, बल्कि इस्राइल के ऐतिहासिक और राजनीतिक परिदृश्यों को भी सामने लाती हैं। ज्यादातर लोगों के लिए वह दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी हैं, वहीं कुछ उन्हें ऐसा मध्यमार्गी मानते हैं, जो अरबों के प्रति काफी नर्म है और हथियार जल्दी डाल देता है। नेतन्याहू 1991 से ही अरब और इस्राइल के बीच की राजनीति के केंद्र बने हुए हैं, जब सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में उनके शब्दों, गंभीरता और शैली ने इस्राइल के भीतर और बाहर उन्हें चर्चाओं में ला दिया।
नील लॉचेरी की किताब, रेसिस्टेबल राइज ऑफ बेंजामिन नेतन्याहू तटस्थ ढंग से न केवल नेतन्याहू की जिंदगी, बल्कि इस्लामी आतंकवाद के उभार, तेल की राजनीति और नेतन्याहू पर इस्राइली मीडिया के अमेरिकीकरण के आरोपों का भी विश्लेषण करती है। बीबी : माई स्टोरी के लेखक खुद बेंजामिन नेतन्याहू हैं, जिसमें वह अपने परिवार, राजनीति के शिखर तक के अपने सफर और पड़ोसी मुल्कों की अशांत राजनीति के बावजूद आम इस्राइली का भरोसा जीतने की कहानी अपने शब्दों में कहते हैं। नेतन्याहू आज जो हैं, उसमें यह किताब उनके परिवार का योगदान बताती है। जब वह अपने पिता से पूछते हैं कि वह कौन-सा एक गुण है, जो इस्राइली प्रधानमंत्री में जरूर होना चाहिए, तब उनके पिता कहते हैं कि इस्राइल के प्रधानमंत्री को शिक्षित होना चाहिए, ताकि उन्हें क्लर्कों पर निर्भर रहना न पड़े।
इस आत्मकथा में भावनाएं, विचार और आदर्श तीनों हैं। दूसरे राजनीतिक आत्मकथाओं की तरह इसमें तथ्यों को छिपाने की कोशिश नहीं है, 650 पृष्ठों की यह किताब विभिन्न मुद्दों पर उनकी राय जानने का एक बेहतरीन और प्रामाणिक जरिया है। जब वह अमेरिका के बारे में कहते हैं, कि इस मुल्क से उनके रिश्ते कभी बिगड़ नहीं सकते। या, जब वह ईरान के बारे में कहते हैं, कि यह मुल्क भरोसे लायक नहीं, तो वह अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे होते हैं। उनके शब्दों में गुस्सा भी है, झुंझलाहट भी और आत्मीयता भी। जब वह कहते हैं कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से जबर्दस्त कोई दोस्त नहीं हो सकता। पुस्तक बताती है कि उन पर उनके भाई योनी का बहुत प्रभाव था।
एक अभियान के दौरान उनके भाई की कही गई वह पंक्ति, जिसे वह अपने जीवन का भी आदर्श मानते हैं, ‘मौत से मैं नहीं डरता, क्योंकि मेरी नजर में वह जीवन ज्यादा डरावना होता है, जिसका कोई उद्देश्य न हो।' 1976 में यूगांडा के एंटेबे में आतंकियों द्वारा हाइ्रजैक एक प्लेन से निर्दोष लोगों को मुक्त कराने के एक अभियान में उनके भाई की मृत्यु हुई थी। नेतन्याहू लिखते हैं, 'योनी मर गया लेकिन उसका खून अभी भी मेरी नसों में उबल रहा है।' वह अच्छे हैं या बुरे वह तो खैर राजनीति है, लेकिन, खासकर इस्राइल और मध्य पूर्व के राजनीतिक इतिहास में उनकी जगह को समझने में ये दोनों पुस्तकें मदद देती हैं।