बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र शास्त्री
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बाबा की कथा और राजद के लिए चिंता
राजद अपने आधार वोटों को लेकर कुछ ज्यादा ही चिंतित दिखी। हनुमंत कथा में अगड़े-पिछड़े सभी वर्गों के लोग आए थे। शायद यही राजद के लिए बेचैनी का सबब था। उसे अपना आधार वोट दरकता दिखाई दिया। हालांकि जदयू का रुख उससे भिन्न था। धीरेन्द्र शास्त्री के विरोध में वह उस तरह से आक्रामक नहीं थी जैसा राजद दिखी।
राजद के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तक ने विरोध में बयान दिए। नीतीश के करीबी और बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने जरूर शुरू में उनके दौरे को लेकर नकारात्मक टिप्पणी की लेकिन बाद में जब बाबा आए तो जदयू की ओर से कोई बयानबाजी नहीं हुई। शायद नेतृत्व ने इस मसले पर अपने नेताओं को खामोश रहने को कहा हो।
इसके ठीक उलट, राजद की तरफ से रोज विरोध में बयानबाजी होती रही। इस दौरान लालू प्रसाद भी पटना में ही थे, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। हां पत्रकारों के पूछने पर उल्टा सवाल दाग दिया कि 'कौन बाबा'? तेजप्रताप द्वारा बाबा का खुला विरोध करने की घोषणा के बाद उनके संगठन डीएसएस के कुछ लड़कों के साथ परेड करते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ था। लेकिन सारी तैयारी धरी की धरी रह गई और बाबा लोगों को हिन्दू राष्ट्र बनाने का संकल्प दिला कर चले भी गए।
अपार भीड़ के सामने आकर बाबा का विरोध करने का साहस तो कोई नहीं जुटा सका लेकिन रात के अंधेरे में उनके पोस्टर पर कालिख पोत कर और उसे फाड़ कर खीझ जरूर उतारी गई। इस पर बाबा ने चुटकी लेते हुए कहा कि पोस्टर तो हटा दोगे लेकिन बिहार के लोगों के दिल से मुझे कैसे हटाओगे?
नजर आया सत्तारूढ़ महागठबंधन का अंतर्विरोध
बाबा बागेश्वर के दौरे को लेकर बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन का अंतर्विरोध साफ-साफ नजर आया। महागठबंधन के ज्यादातर दल-जदयू, कांग्रेस और वामदल बागेश्वर धाम का सीधा विरोध करने से बचते रहे वहीं राजद ने जमकर विरोध किया। राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने तो सीधे -सीधे धीरेन्द्र शास्त्री की गिरफ्तारी की मांग कर दी। लेकिन महागठबंधन के अन्य किसी दलों ने उनकी इस मांग का समर्थन नहीं किया।
इस मसले पर राजद अलग -थलग नजर आई। हां, भाजपा ने इस विरोध का लाभ लेने की पूरी कोशिश की। उसके नेता लगातार धीरेन्द्र शास्त्री के पक्ष में बयान देते रहे। कई नेता तो साए की तरह बाबा के साथ लगे रहे।
बाबा के दौरे से आम लोगों में जो धार्मिक जोश और एकता देखी गई उसमें भाजपा अपने लिए संभावना देख रही है। बाबा के बिहार का दौरा करते रहने की घोषणा से भाजपा उत्साहित है, तो राजद चिंता में है। भाजपा धीरेन्द्र शास्त्री को हिंदुत्व के नए पोस्टर ब्वॉय के रूप में देख रही है। भाजपा जातियों में बिखरे हिन्दुओं को एकजुट करने में उतनी सफल नहीं हो पाई जैसा धीरेन्द्र शास्त्री के एक दौरे ने कर दिखाया।
बाबा ने कुछ माह बाद मुजफ्फरपुर और फिर गया में कथा का आयोजन करने की घोषणा की है। माना जाना चाहिए अगले चुनाव तक बागेश्वर के पीठाधीश्वर का बिहार में आना -जाना लगा रहेगा। राजद के तीखे विरोध के पीछे चुनावी भविष्य की चिंता से इंकार नहीं किया जा सकता। महागठबंधन हिंदुत्व के इस नए पोस्टर ब्वॉय से कैसे निपटती है यह देखना दिलचस्प होगा।
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