अब साहित्य के एक टावर पर निंदनीय हमला हुआ है। वे जल्द स्वस्थ हों यही कामना है।
- फोटो : Social Media
उपन्यास भारत विभाजन, प्रवासियों का संघर्ष-कठिनाइयां उनकी अस्मिता, नए देश में उनके विचित्र अनुभव और नए संबंध, परिवार, समुदाय, देश सब पर अंगुली धरता है। इसके पहले संस्करण में ‘विधवा’ शब्द मुख्य रूप से रेखांकित किया गया था जिस पर इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के कोर्ट में मुकदमा किया वे जीत गई और प्रकाशक को अगले संस्करण में यह शब्द हटाते हुए कुछ सुधार किया। अब तो इस उपन्यास पार फ़िल्म बन चुकी है जो मुझे बहुत अच्छी नहीं लगी। जिस पर फ़िर कभी।
रुश्दी पर किताबें और उनकी जिंदगी
रुश्दी पर किताबें लिखी गई हैं, लिखी जाएंगी। इंग्लिश भाषा पर रुश्दी का अधिकार तथा यथार्थ और कल्पना का अद्भुत मिश्रण चकित करने वाला उनका ‘दि एंचान्ट्रेस ऑफ़ फ़्लोरेंस’ अपने नाम के अनुरूप पाठक को अपनी माया में घेरता है। यहां रुश्दी अकबर, अधम खान, बाबर, मेकियावेली, ओटोमन साम्राज्य के सुल्तान महमद, बायजिद, सलीम जैसे ऐतिहासिक चरित्रों के साथ-साथ कारा कोज़ या काली आंखों वाली लेडी का काल्पनिक चरित्र गढ़ते हैं।
इस मैजिक रियलिज्म की कहानी फ़तेहपुर सीकरी में अकबर के दरबार में प्रारंभ होती है। सात भाषाओं में स्वप्न देखने वाला एक युवा यूरोपियन यात्री दरबार में पहुंचता है और अकबर को अपना रिश्तेदार बताता है। कहानी सुनाते हुए दावा करता है कि वह इंग्लैंड की महारानी का राजदूत और बाबर की सबसे छोटी बहन का बेटा है। यह शहजादी कारा कोज़, ‘लेडी ब्लैक आईज’ न केवल गजब की सुंदरी है वरन उसके पास मायावी शक्ति है। अपनी जान बचाने के लिए इस जादूगरनी को बाबर ने एक उज़बेक को दे दिया। वहां से वह फ़ारस के शाह के पास पहुंची और अंतत: ओटोमन सुल्तान की सेना के कमांडर अर्गालिआ की प्रेमिका बनी।
कारा कोज़ पुरुषों की दुनिया में अपना भाग्य लिखने की चेष्टा कर रही है। कारा का चरित्र पुरुष की आंख से रचा गया है, उसकी सत्ता बहुत सीमित है, मात्र बिस्तर तक, यह राजसी बिस्तर हो भी हो सकता है। मंत्रमुग्ध करने वाले इस उपन्यास में रुश्दी फ़तेहपुर और फ़्लोरेंस दोनों शहरों को सजीव करते हैं।
पाठक सम्राट अकबर की राजधानी वैभवशाली सीकरी, अकबर के शयनकक्ष की झाँकी पाता है। अकबर धर्म, विश्वास-आस्था, लालसा के प्रश्नों से जूझ रहा है, बेटों के षडयंत्र, पत्नी और एक मानसिक पत्नी-प्रेमिका का सामना उसे करना है। पूरा फ़्लोरेंस इस बला की खूबसूरत स्त्री के इंद्रजाल में पड़ता है। वह सुंदरता ही क्या जो मुसीबत न खड़ी करे? इस उपन्यास में भी कारा कोज़ तमाम समस्याओं की जड़ बनती है।
‘दि एंचान्ट्रेस ऑफ़ फ़्लोरेंस’ के कारण नहीं पर अन्य कई कारण से कई बार सलमान रुश्दी मुसीबत में पड़े हैं। इस बार उनके लिए यह जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है। कल वे न्यूयॉर्क के एक सुदूर इलाके में ‘अमेरिका: निर्वासित लेखकों की शरणस्थली तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सुरक्षित घर’। पर अमेरिका भी सुरक्षित नहीं है। वहां भी टॉवर गिरते हैं और अब साहित्य के एक टावर पर निंदनीय हमला हुआ है। वे जल्द स्वस्थ हों यही कामना है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।