झांसी। बुंदेलखंड में दिनों-दिन पेयजल संकट गहराता जा रहा है। झांसी जिले के चार ब्लाक के दस गांवों में भूगर्भ जल लगभग खत्म हो गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों को फौरी राहत देने के लिए प्रशासन द्वारा इन गांवों में टैंकरों से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। लेकिन, यह भी नाकाफी साबित हो रही है।
सूखे की विभीषिका से जूझ रहे बुंदेलखंड का भूगर्भ जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। गांवों में लगे हैंडपंपों ने जहां पानी छोड़ दिया है, वहीं कुएं भी सूख चुके हैं। हालांकि, उप्र सरकार सूखे की स्थिति से निपटने के लिए तमाम प्रयास कर रही है, मगर धरातल पर उसके निर्देश पूरी तरह क्रियान्वित नहीं हो रहे हैं। अधिकारियों ने पेयजल संकट से निपटने के लिए टैंकरों से आपूर्ति शुरू करवा दी है। प्
रत्येक संकटग्रस्त गांव में एक-एक टैंकर लगाया गया है। यह टैंकर आसपास स्थित जल स्रोत से पानी भरकर दिन भर गांवों में वितरित कर रहे हैं। गांव मेें हैंडपंप और कुएं थोड़ा-बहुत ही पानी दे रहे हैं, ऐसे में स्थिति भयावह होती जा रही है। जिला विकास कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जनपद के चार ब्लाकों के दस गांवों में पानी लगभग खत्म हो गया है। अधिकारी इस मामले को गंभीरता के साथ ले रहे हैं।
यहां गहराया पेयजल संकट
1. बबीना ब्लाक का ग्राम खजराहा खुर्द
2. मोंठ ब्लाक का ग्राम इमिलिया
3. बामौर ब्लाक के ग्राम बिजना, अड़जार, मगरपुर, खिसनी बुजुर्ग एवं खिसनी खुर्द
4. चिरगांव ब्लाक के ग्राम रोरा, बकायन एवं सारौल
‘पेयजल संकट से झांसी के कई गांवों जूझ रहे हैं। इनमें से दस गांवों में पानी का संकट कुछ ज्यादा ही गहरा गया है। यहां टैंकरों से आपूर्ति की जा रही है। यदि जरूरत पड़ती है तो टैंकर की संख्या बढ़ाई जाएगी। शासन से स्पष्ट आदेश हैं कि किसी भी स्थिति में गांवों में पेयजल की कमी नहीं होना चाहिए। गांव के प्रधान से लगातार विभागीय अधिकारी व कर्मचारी संपर्क में हैं और किसी भी आपात स्थिति में सुविधाएं बढ़ाने को तैयार हैं।’
के के सिंह
जिला पंचायत राज अधिकारी, झांसी