चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में एक दिन में दो नाटकों का मंचन किया गया, जिनकी कहानियां इतनी जबरदस्त थी कि खूब तालियां बजीं। थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन पंजाब कला भवन में गुलजार के नाटक खौफ और निर्मल वर्मा के सोलो प्ले धूप का टुकड़ा का मंचन किया गया। थिएटर फेस्टिवल का आयोजन सिटी एंटरटेनमेंट नटवर्क द्वारा किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत गुलजार के नाटक खौफ से हुई। इस नाटक में विभाजन के बाद दो धर्मों के बीच विरोध- प्रदर्शन के दौरान झुलसती इंसानियत को दिखाया गया है। नाटक में एक इंसान की कहानी का वर्णन किया गया है जो दंगे फसाद से बचता हुआ एक ट्रेन में चढ ़जाता है। डिब्बे में उसे एक व्यक्ति दिखाई देता है जिसे देखकर पहले वाले व्यक्ति को लगता है कि मानो वह उसे मारने आ रहा हो।
वह अपने आप को उस इंसान से बचाने के तरीके सोचता है। उसके मन में बार- बार एक ही ख्याल आता है कि अब उसका अंत निकट है। एक समय वह इतना भयभीत हो जाता है कि वह दूसरे व्यक्ति को ट्रेन से धक्का दे देता है। गिरते समय दूसरे व्यक्ति के मुंह से या अल्लाह शब्द निकलता है। यह सुनकर वह घबरा जाता है और सोचता है कि यह उसने क्या कर दिया?
खौफ में आकर अपने ही धर्म के इंसान का कत्ल कर दिया? इस तरह इस नाटक में यह दिखाया गया कि कैसे मौत के खौफ ने एक इंसान को अपने ही मजहब के इंसान का कत्ल करने पर मजबूर कर दिया। नीतू शर्मा द्वारा निर्देशित 20 मिनट के इस सोलो एक्ट को गौरव शर्मा ने पेश किया।