आवास न मिला तो शौचालय में बनाई रसोई
खुर्जा। तहसील क्षेत्र के गांव हजरतपुर में रहने के लिए घर न होने के कारण ग्रामीण ने शौचालय को ही अपना आशियाना बना लिया है। शौचालय में पत्थर रख खाना बनाते हैं, बारिश के दौरान छप्पर टपकने पर पूरा परिवार शौचालय में एकत्रित हो जाता है। सरकारी पैसे से दो साल पूर्व परिवार के लिए शौचालय तो बना दिया गया लेकिन आवेदन करने के बाद भी अभी तक घर नहीं मिल पाया है। ग्राम समाज की जमीन पर छोटी सी झोपड़ी डालकर परिवार किसी तरह गुजर बसर कर रहा है।
गांव हजरतपुर निवासी बॉबी पॉटरी में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करता है। परिवार में उसकी पत्नी पायल तीन बेटियां और दिव्यांग बड़ा भाई है। ग्राम समाज की जमीन पर झोपड़ी बनाकर पूरा परिवार उसी में रहता है। गांव के तत्कालीन प्रधान ने दो साल पूर्व एक शौचालय बनवाया था। झोपड़ी में पर्याप्त जगह न होने के कारण पॉट पर पत्थर रखकर परिवार शौचालय में ही खाना बनाता है। उसी में खाने पीने का सारा सामान भी रखा हुआ है। हालत यह है कि बारिश के मौसम में पूरी झोपड़ी टपकने लगती है। बचने के लिए पूरा परिवार शौचालय में आ जाता है। बॉबी की पत्नी पायल ने बताया कि कई बार बारिश में पूरी रात शौचालय में बैठकर काटनी पड़ी। छोटे से शौचालय में एक साथ पूरा परिवार बड़ी मुश्किल से आ पाते हैं।
बॉबी ने बताया कि प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्होंने आवेदन किया था, लेकिन तीन साल बीत गए आज तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया। बड़ा भाई दिव्यांग होने के कारण कुछ भी करने में अक्षम है। ऐसे में मजदूरी कर पूरे परिवार का पेट भरना पड़ रहा है।
171 लोगों को मिला आवास का लक्ष्य
जिले में हुए एक सर्वे में सात हजार लोग ऐसे मिले थे जिनके पास रहने के लिए अपना घर नहीं है। इन सभी प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र मानते हुए सूची शासन को भेज दी गई थी। जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शासन से 171 लोगों को इस बार आवास का लक्ष्य दिया गया है। उनमें से 34 लोग खुर्जा तहसील क्षेत्र के हैं। इसके लिए 58 लाख की राशि जारी कर दी गई है। 40-40 हजार रुपये की पहली किस्त लाभार्थियों को भेजी जा चुकी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के लिए 1.20 लाख रुपये का प्रावधान है। पहली किस्त में चालीस हजार, दूसरी किस्त 70 हजार और तीसरी किस्त में दस हजार रुपये जारी किए जाते हैं।
हजरतपुर निवासी ग्रामीण का परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थी है। उसका नाम चयनित कर भेजा जाएगा। उसके बाद उसे योजना का लाभ दिलाया जाएगा। - विनय कुमार श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य अभिकरण विकास विभाग।