फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला को बालिग युवती की कस्टडी देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार 

Sat, 06 Jan 2018 02:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
supreme court
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर बालिग युवती को अपनी मर्जी से जिंदगी जीने का अधिकार है और इस तरह के मामलों में शीर्ष अदालत % महा अभिभावक’ भी भूमिका अदा नहीं कर सकता। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने ये टिप्पणी करते हुए एक तलाकशुदा महिला को बालिग बेटी को कस्टडी में देने से इनकार कर दिया। बालिग बेटी कुवैत में अपने पिता केसाथ रहना चाहती है। 
विज्ञापन


पढ़ें- ‘बेटियों को जीने का अधिकार दें’

पीठ ने कहा कि बालिग युवती को अपने मर्जी से जीवन जीने का अधिकार है और इस पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती। बालिग युवती अपने मर्जी के जहां जाना चाहती है वह जा सकती है और वह जो करना चाहती है वह कर सकती है। उसे अपने मकसद को पूरा करने से नहीं रोका जा सकता। सुप्रीम कोर्ट उस महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसने बालिग बेटी की कस्टडी देने की गुहार की थी। महिला का कहना था कि निचली अदालत ने उसे बेटी की कस्टडी दी थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन गत वर्ष सितंबर महीने में बेटी बालिग हो गई। इसकेबाद बेटी ने कुवैत में रह रहे पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। लिहाजा मां ने पिता केखिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी। लेकिन पीठ ने कस्टडी को लेकर किसी तरह का आदेश नहीं पारित किया लेकिन कहा कि चूंकि युवती बालिग हो गई है इसलिए उसे अपना निर्णय लेने का अधिकार है। पीठ ने कहा कि आखिर हम बालिग युवती को ऐसा करने से कैसे रोक सकते हैं। 
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें