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सरकारी प्राईमरी स्कूलों को गोद लेगें भाजपा नेता व पदाधिकारी

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सरकारी प्राइमरी स्कूलों को गोद लेंगे भाजपा नेता व पदाधिकारी
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ललितपुर।
सरकारी प्राइमरी स्कूलों की बदहाली को सुधारने व शैक्षिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों, नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा प्राइमरी स्कूलों को गोद लिया जा रहा है। कई पदाधिकारी अब तक विद्यालय को गोद भी ले चुके हैं।
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की दुर्दशा को सुधारने के लिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ दिनों पूर्व प्रदेश सरकार ने अधिकारियों और अफसरों के साथ सूबे के सरकारी विद्यालयों के हालातों को सुधारने की जिम्मेदारी पार्टी के पदाधिकारियों, नेताओं और जन प्रतिनिधियों को भी सौंपने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी व नेता भी जनपद के प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों को गोद लेगें। इस संबंध में प्रदेश संगठन ने विगत रोज पार्टी के जिलाध्यक्ष को पत्र जारी करके निर्देश भी दे दिए हैं। यह जानकारी देते हुए जिलाध्यक्ष रमेश सिंह लोधी ने बताया कि प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था को सुधारने व बेहतर बनाने के लिए तमाम योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा विद्यालयों को गोद लेने का उद्देश्य यही है कि सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों में चलाई जा रही योजनाओं का लाभ शासन की मंशा के अनुरूप हर बच्चे तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि पार्टी के समस्त पदाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जल्द ही सभी के द्वारा विद्यालयों को गोद ले लिया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने अपने ही गांव बार का प्राइमरी विद्यालय गोद ले लिया है, इसी विद्यालय में उन्होंने अपनी प्राइमरी शिक्षा ग्रहण की थी और अब सबसे पहले इसी विद्यालय के हालातों को सुधारेगें। वहीं सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे ने सिविल लाइन क्षेत्र का प्राईमरी विद्यालय और सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने बुढ़वार का प्राईमारी विद्यालय गोद ले लिया है।
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इस तरह सुधारने होंगे हालात
भाजपा के नेता व पदाधिकारी जिन विद्यालयों को गोद लेगें उन विद्यालयों में केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं जैसे मध्याह्न भोजन, नि:शुल्क यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्कूल बैग व स्वेटर वितरण आदि योजनाओं का क्रियान्वयन कराने की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी, ताकि इन योजनाओं का लाभ हर बच्चे तक पहुंचे। इसके साथ ही विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति और शैक्षिक व्यवस्था में सुधार लाना होगा। वहीं विद्यालय परिसर में स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, विद्यालय की रंगाई-पुताई आदि पर ध्यान देना होगा।
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