30jjrp21- अपनी दोनों रिपोर्ट दिखाते हुए महिला कौशल्या। संवाद
- फोटो : Archive
झज्जर। सिविल अस्पताल में एक बार फिर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल में महिला मरीज का अल्ट्रासाउंड करने के बाद विशेषज्ञ ने पथरी न होने की बात कही, जबकि आधे घंटे बाद निजी अस्पताल में दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने पर 8.8 एमएम की पथरी सामने आई। महिला मरीज और उनके पति ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री को भेजी है।
वार्ड नंबर-15 से पार्षद नरेश कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन से दो-तीन दिन पहले उनकी पत्नी कौशल्या के पेट में दर्द हुआ था। वह उन्हें सरकारी अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन उस समय यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं थी। इस पर निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाया गया, जहां 8 एमएम की पथरी बताई गई। कुछ समय बाद वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज में जांच करवाई तो वहां 8.8 एमएम की पथरी बताई गई और ऑपरेशन की सलाह दी गई। इस पर उन्होंने ऑपरेशन नहीं करवाया और दवा ले ली। उन्हें उम्मीद थी कि दवा से पथरी निकल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तीन-चार दिन पहले उनकी पत्नी को फिर से पथरी का दर्द हुआ। वह 29 सितंबर को पत्नी को लेकर सरकारी अस्पताल गए, जहां अल्ट्रासाउंड लिखा गया। जांच के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर ने पथरी न होने की बात कही।
इस पर उन्हें यकीन नहीं हुआ, क्योंकि उनकी पत्नी दर्द से पीड़ित थीं। उन्होंने आधे घंटे बाद निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें 8.8 एमएम की पथरी बताई गई। पार्षद ने कहा कि यह अस्पताल की सरासर लापरवाही है, जिससे किसी की जान पर बन सकती थी। यदि अस्पताल में अच्छी सुविधा नहीं थी तो डॉक्टर को बताना चाहिए था, लेकिन उन्होंने मरीज को ''ग्रीन सिग्नल'' देकर भेज दिया, जो उनकी जान पर भारी पड़ सकता था। इस मामले में नरेश कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर शिकायत की है।
मामला संज्ञान में नहीं है। रिपोर्ट देखने या डॉक्टर से पूछने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। डॉ. अजय सिंगला, एसएमओ