सीएएम ने बजट भाषण में कहा कि प्रदेश में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं हैं लेकिन सेवा तथा व्यापार क्षेत्र को प्रोत्साहित करने रोजगार एवं कौशल विकास के लिए कोई योजना नहीं है।
इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक नई योजना “मुख्यमन्त्री युवा आजीविका योजना” शुरू करने की घोषणा की गई है। इसमें खुदरा व्यापार/दुकान, रेस्टोरेंट, टूर ऑपरेटर, साहसिक पर्यटन, परम्परागत शिल्प इत्यादि कार्य शामिल होंगे।
जिसके लिए 18 से 35 वर्ष के बीच के हिमाचली युवाओं को तीन तरह के प्रोत्साहन दिए जाएंगे।पहला 30 लाख तक की राशि तक, भूमि व मकान को छोड़कर किए निवेश पर 25 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा जबकि महिला उद्यमियों के लिए उपदान 30 प्रतिशत होगा।
दूसरा 30 लाख तक के ऋण पर तीन वर्षों के लिए पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। तीसरा व्यापार तथा सेवा कार्य आरंभ करने हेतु भूमि तथा भवन के क्रय पर स्टांप ड्यूटी तीन प्रतिशत की दर से ली जाएगी। इस योजना के लिए वर्ष 2018-19 में 75 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है।
राज्य सरकार कौशल विकास को लाभप्रद रोजगार प्राप्त करने हेतु काफी महत्व देती है। वर्ष 2018-19 में राज्य सरकार “दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना” को 77 करोड़ की लागत से लागू करेगी।
उद्यमशीलता
हिमाचल के बेरोजगार युवाओं में उद्यमशीलता की भावना उत्पन्न करने के उदे्श्य से राज्य सरकार द्वारा उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए “उद्यम विकास कार्यक्रम”आयोजित किए जाएंगे। राज्य सरकार बैंको के साथ संयुक्त रूप से ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में ऐसे पाठ्यक्रम लागू करेगी।
सरकार एशियन विकास बैंक द्वारा पोषित कौशल विकास कार्यक्रम के माध्यम से 65 हजार युवाओं को कौशल प्रदान कर रोजगार दिलाएगी। राज्य सरकार ने “प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना” में 21.56 करोड़ की पहली किस्त प्राप्त कर ली है।
इस योजना के अन्तर्गत 49,500 बेरोजगार युवाओं को रोजगार संबंधी कौशल प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा हिमाचली युवाओं के कौशल विकास के लिएकौशल विकास भत्ता दिया जाता रहेगा।
राज्य सरकार अंग्रेजी भाषा बोलने हेतु प्रशिक्षण के लिए अच्छी संस्थाओं को सूचीबद्ध करेगी। सरकार ऐसे सभी युवाओं को जो उद्योगों में रोजगार प्राप्त करेंगे, दो वर्ष तक यह कौशल विकास भत्ता देती रहेगी।
कौशल विकास भत्ते के लिए 100 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है। अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग एकल महिला, विधवा एवं परित्यक्त नारियों को रोजगार दिलाने के लिए उनका कौशल प्रशिक्षण किया जाएगा।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन-जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग के उन विद्यार्थियों को, जिन की पारिवारिक आय तीन लाख वार्षिक से कम है को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के माध्यम से प्रशिक्षण एवं निशुल्क कोचिंग मिलेगी।
दिव्यांगों को निजी क्षेत्र में रोजगार एवं प्रशिक्षणअवसरों के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाएंगे। जयराम ने कहा कि पिछली सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि वे हिमाचल प्रदेश के सभी बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देंगे। लेकिन वे अपनी घोषणा पूरी करने में बुरी तरह
विफल रहे। यह भत्ता केवल 21,000 युवाओं को आखिरी तीन महीनों में दिया गया।
श्रम कानून के अंतर्गत संस्थान के पंजीकरण/नवीनीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। सभी रोजगार केंद्रों को “कौशल पहचान केंद्र तथा आदर्श कैरियर परामर्श केंद्र” के रूप में परिवर्तित करने का प्रस्ताव है।
बेरोजगार युवाओं को परामर्श देने से रोजगार एवं प्लेसमेंट के अवसर बढ़ेंगे। कौशल युक्त लोगों को, रोजगार मेले एवं कैंपस साक्षात्कार के माध्यम से रोजगार प्रदान किया जाएगा। सभी जिलों एवं खंडों में ऐसे रोजगार मेले और कैंपस साक्षात्कार होंगे।
जयराम सरकार ने अपने पहले ही बजट में विज्ञान पर जोर देने की अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी है। बजट में युवा विज्ञान पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार का उद्देश्य युवा छात्र एवं छात्राओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना है।
घोषणा के तहत राज्य शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में विज्ञान संकाय में पहले दस उत्कृष्ट छात्र एवं छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
इसके अलावा सरकार चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में एक-एक विज्ञान ग्राम स्थापित करेगी। ऐसे गांवों में स्थानीय किसानों और अन्य समूहों को प्रशिक्षण देकर उनका क्षमता विकास किया जाएगा।
वहीं, राज्य में चल रहे उद्योगों का पर्यावरण आडिट कराया जाएगा ताकि पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन अनुकूल कार्यक्रम के तहत दो जिलों में जलवायु परिवर्तन की संवेदनशीलता को कम करने के लिए ज्ञानवर्धक योजना भी बनाई जाएगी।
वहीं, ब्यास नदी बेसिन में स्थित कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा की 1200 पंचायतों के लगभग 7 हजार गांवों में जलवायु परिवर्तन की संवेदनशीलता का आंकलन भी किया जाएगा।
बजट में सरकार ने 2011 में शुरू किए गए आर्यभट्ट जियो इंफोर्मेटिक केंद्र के माध्यम से लोक प्रशासन और नागरिक सेवा को प्रभावी बनाया जाएगा। इसके तहत पहले चरण में लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास एवं पर्यटन विभाग के लिए आनलाइन निगरानी प्रणाली विकसित करेगी।
पर्यावरण प्रबंधन सुविधा को मजबूत बनाने पर भी जयराम सरकार का जोर है। इसी के तहत सरकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक नई प्रयोगशाला सुंदरनगर में स्थापित करेगा। स्वास्थ्य विभाग को भी बोर्ड बायो मेडिकल कचरा शोधन संयंत्र के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
जनता को प्रदूषण के बारे में जागरूक करने के लिए 12 स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले स्क्रीन लगाई जाएगी। दस शहरी स्थानीय निकायों को भी बोर्ड कचरा प्रबंधन के लिए तकनीकी उपाय सुझाएगा।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वर्ष 2018-19 के बजट में हिमाचल के बेरोजगार युवाओं को 1500 रूट परमिट जारी करने का फैसला लिया है। यात्रियों की बस कब आएगी, इसके लिए हिमाचल के हर बस अड्डों और स्टापेज पर इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले लगाने का फैसला लिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क ही परिवहन का मुख्य साधन है। परिवहन निगम की बसों में स्वाइप/टैप मशीनें लगेंगी। इससे भुगतान इलेक्ट्रानिक कैश कार्ड के माध्यम से होगा। इससे यात्रियों को भुगतान करने में कठिनाई भी नहीं होगी।
पास धारकों और छूट प्राप्त श्रेणियों को परिवहन निगम की ओर से इलेक्ट्रानिक कार्ड जारी किए जाएंगे। परिवहन विभाग लोगों की सुविधा के लिए ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से लोक सेवाएं लागू करेगा।
आरटीओ और आरएलए कार्यालय में पीओएस मशीनें स्थापित होंगी। इसके तहत करों और फीसों की अदायगी के लिए कैश लेस सुविधा उपलब्ध होगी। नए वाहनों का पंजीकरण डीलर प्वाइंट पर होता है। इसको खत्म करने के लिए सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण साफ्टवेयर का शुभारंभ करने का फैसला लिया है।
सरकार ने सेना के शहीदों के आश्रितों को रोजगार में कोटा देने की तर्ज पर अर्द्ध सैन्य बलों के शहीदों के आश्रितों को भी रोजगार देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2018-19 के वार्षिक बजट में यह घोषणा की है।
जयराम सरकार ने लंबे समय से अर्द्ध सैन्य बलों की मांग को पूरा करने का फैसला लिया है। सेना की तरह सुविधाएं मांग रहे अर्द्ध सैन्य बलों में शहीदों के आश्रितों को रोजगार गारंटी मिलनी है।
अभी यह रोजगार शहीद सैनिकों के आश्रितों को दिया जाता था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों को अनुमोदित सैन्य सेवा के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता को बंद कर दिया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इन लाभों को बहाल कर दिया है।