एंबुलेंस में गर्भवती की सफल डिलीवरी के बाद गोद में बच्चे को उठाए फार्मासिसट और चालक।
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डॉक्टर ने मुश्किल और जच्चा-बच्चा के लिए खतरा बताकर जिस प्रसव से हाथ खड़े कर दिए, उसे 108 एंबुलेंस के फार्मासिस्ट और ड्राइवर ने सफलता पूर्वक करा दिया। मामला हिमाचल के सोलन जिले का है। अर्की अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जा रही है।
सोलन-बिलासपुर सीमा से सटे मलोखर निवासी लालचंद ने बताया कि वह अपनी पत्नी पार्वती देवी (26) को प्रसव पीड़ा के कारण अर्की अस्पताल ले आया। अस्पताल में रात तीन बजे प्रसूता की हालत क्रिटिकल कहते हुए गंभीर अवस्था में उसे शिमला रेफर कर दिया।
पत्नी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। 108 एंबुलेंस सेवा से वे शिमला के लिए निकल पड़े। अर्की अस्पताल के मुताबिक उनकी पत्नी की हालत गंभीर थी। लेकिन अर्की अस्पताल से लगभग 17 किलोमीटर आगे शिमला-मंडी एनएच पर सोलह मील नामक जगह पर उनकी पत्नी की हालत बिगड़ने लगी।
फार्मासिस्ट और ड्राइवर ने कराया प्रसव
बीएमओ का कहना है कि महिला का पल्स रेट काफी लो था। इसलिए रिस्क नहीं लिया।
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हालत देखते हुए 108 वाहन में कार्यरत ईएमटी फार्मासिस्ट संजय कुमार और ड्राइवर संजीव कुमार ने प्राथमिक चिकित्सा देते हुए प्रसव करवाने की कोशिश की और सफल प्रसव करवा दिया। लालचंद के अनुसार जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं और कमल नेहरू अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
तो अस्पताल में क्यों नहीं कराई डिलिवरी
लालचंद का कहना है कि जब 108 के कर्मचारियों ने आराम से प्रसव करवा दिया तो क्या अस्पताल में यह प्रसव नहीं हो सकता था। क्षेत्र में जहां 108 के ईएनटी फार्मासिस्ट और ड्राइवर की सूझबूझ व अपने काम के प्रति निष्ठा की प्रशंसा हो रही है, वहीं क्षेत्र में अस्पताल की कार्यशैली पर रोष जताया जा रहा है।
लो था पल्स रेट, इसलिए नहीं लिया रिस्क
बीएमओ अर्की एसएल वर्मा ने बताया कि मलोखर से यह केस आया था। ड्यूटी पर डॉक्टर ने गर्भवती महिला की जांच की। महिला की पल्स रेट काफी लो थी। गायनी का पद भी खाली है। ऐसे में डॉक्टर किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इसीलिए महिला को शिमला रेफर किया गया। कहा कि अर्की अस्पताल में स्वीकृत छह पदों में से महज दो डॉक्टरों के पद भरे हैं। इससे भारी परेशानी हो रही है।