विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का 805वां सालाना उर्स की औपचारिक शुरुआत 24 मार्च को होगी। उर्स में पाकिस्तानी जत्था भी शिरकत करेगा। इसके लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है।
ख्वाजा साहब के उर्स की तैयारियों में जिला प्रशासन, रेलवे और दरगाह कमेटी जुटी हुई है। इन तैयारियों के बीच खुफिया विभाग को पाकिस्तानी जत्थे के उर्स में शामिल होने के संबंध में विशेष निर्देश भी दिए गए हैं। हर बार की तरह इस बार भी पाकिस्तान से 500 ज़ायरीन का जत्था विशेष ट्रेन के जरिए अजमेर आएगा। फिलहाल जत्थे के आने की दिनांक निश्चित नहीं की गई है लेकिन जत्थे के आगमन के लिए केन्द्र सरकार ने मुहर लगा दी है।
सूफी संत ख्वाजा साहब की दरगाह देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपना महत्व रखती है। विश्व के कोने-कोने से लोग यहां पहुंचते हैं। ख्वाजा साहब ने अमन का पैगाम दिया था और हर कोई अमन की दुआ कर यहां से लौटता है। केन्द्र सरकार वर्तमान हालात के मद्देनजर पाकिस्तानी जत्थे को अजमेर आगमन की स्वीकृति देकर दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने का प्रयास कर रही है।