गरीब बच्चों के दाखिले के लिए निर्धारित 10 फीसदी कोटे को सख्ती से लागू करवाने के लिए हरियाणा सरकार ने कमर कस ली है।
धारा 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला न देने वाले हरियाणा के निजी स्कूल संचालकों को घेरने की तैयारी शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। प्रदेश के फाइव स्टार स्कूलों पर राज्य सरकार की पैनी नजर है। जिसमें पंचकूला, गुड़गांव और फरीदाबाद के बड़े निजी स्कूल हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब यदि ये स्कूल गरीब बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करेंगे तो उनकी मान्यता रद्द हो सकती है। शिक्षा विभाग यह प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेज रहा है। इसके साथ ही सभी स्कूलों को अपने वेबसाइट पर उनके यहां मौजूद 10 फीसदी सीटों का ब्योरा देना होगा। ऐसा नहीं करने पर स्कूलों के सामने मान्यता बने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा।
जिन स्कूलों को हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) ने रियायतों पर जमीन दी है, उनमें दाखिले का यह प्रतिशत 10 के बजाय 20 होगा।
इसके अलावा जिला स्तर पर कमेटियां बनाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी या जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी इन कमेटियों की अध्यक्षता करेंगे। यदि स्कूल किसी जायज बच्चे को दाखिला देने से मना करते हैं तो यह कमेटी मामले की जांच कर मान्यता रद्द करने की सिफारिश करेगी।
यह लोग होंगे कमेटी में शामिल:
-सामाजिक हैसियत रखने वाले दो व्यक्ति, जिन्हें प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग नामित करेंगी
-एक व्यक्ति जो अभिभावकों की एसोसिएशन की तरफ से होगा
-एक व्यक्ति निजी स्कूल एसोसिएशन की तरफ से शामिल होगा