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52 साल की रिसर्च में खुलासा: उत्तर-पश्चिम भारत बना गर्मी का केंद्र, पंजाब- हरियाणा में सबसे तेजी से बढ़ा पारा

Mon, 21 Sep 2026 09:17 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

अध्ययन में पाया गया है कि पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में दिन के तापमान,  उमस और लू की गंभीरता के आंकड़े देश में सबसे चिंताजनक हैं।
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विस्तार
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वर्ष 1971 से 2022 तक भारत के मौसम का अध्ययन करने वाली एक नई राष्ट्रीय रिपोर्ट में उत्तर-पश्चिम भारत को देश का सबसे अधिक गर्मी प्रभावित क्षेत्र बताया गया है। इस क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं सबसे तेज़ी से बढ़ रही हैं और देश के सबसे बड़े भू-भाग को प्रभावित कर रही हैं। पंजाब और हरियाणा इसी क्षेत्र का हिस्सा हैं, जिस के साथ राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं। 'एवोल्यूशन ऑफ क्लाइमेट एक्सट्रीम्स ओवर द इंडियन सबकॉन्टिनेंटयूजिंग अ रिवाइज्ड   CEI' शीर्षक से यह स्टडी पीयर-रिव्यूड जर्नल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी में प्रकाशित हुई है। इसे भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदरफोरकास्टिंग (NCMRWF) के वैज्ञानिकों ने किया है।इसमें दिन की गर्मी, उमस भरी गर्मी, हीटवेव की तीव्रता और सूखे सहित सात अलग-अलग खतरों को मिलाकर एक सिंगल इंडिया क्लाइमेट एक्सट्रीम्स इंडेक्स बनाया गया है। यह इंडेक्स IMD के 52 साल के मूल्यांकन  पर आधारित है, और इसमें ट्रेंड्स को मान-केंडलमेथड से परखा गया है।
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"यह अध्ययन, जिसका शीर्षक ‘'इवोल्यूशन ऑफ क्लाइमेट एक्सट्रीम्स ओवर द इंडियन सबकॉन्टिनेंटयूज़िंग अ रिवाइज़्डCEI'’ हैं,  जिसे भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) के वैज्ञानिकों द्वारा,पीयर-रिव्यूड'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी'में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन ने सात अलग-अलग खतरों — जिनमें शामिल हैं, (दिन का तापमान, उमस भरी गर्मी, हीटवेव की तीव्रता और सूखा) — को मिलाकर एक 'इंडिया क्लाइमेट एक्सट्रीम्स इंडेक्स' तैयार किया है, जो IMD के 52 वर्षों के अवलोकनों पर आधारित है। जिसके रुझानों का परीक्षण मन-केंडलविधि का उपयोग करके किया गया हैं ।
 
अध्ययन में पाया गया है कि पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में दिन के तापमान,  उमस और लू की गंभीरता के आंकड़े देश में सबसे चिंताजनक हैं। इनमें से लू की गंभीरता इस क्षेत्र में देश के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में सबसे तेज़ी से बढ़ी है। वर्ष 2000 के बाद के कई वर्षों में अत्यधिक दिन की गर्मी का सामना करने वाला क्षेत्र बढ़कर इस पूरे क्षेत्र का 15% से 20%  या उससे अधिक हो गया । शोधकर्ता इस लगातार बनी रहने वाली अत्यधिक गर्मी का संबंध शुष्क परिस्थितियों, सूखती मिट्टी और ज़मीन के अत्यधिक गर्म होने से जोड़ते हैं। इसके साथ ही, रिपोर्ट कहती है कि पंजाब समेत इंडो - गैंगेटिक मैदान में ज़्यादा सिंचाई पर निर्भरता तब और खतरनाक हो जाती है, जब सिंचाई का पानी कम पड़ जाए।"
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उत्तर-पश्चिम भारत देश का सबसे अधिक गर्मी प्रभावित क्षेत्र है। यहां दिन के समय की गर्मी, उमस भरी गर्मी और हीटवेव की गंभीरता—तीनों में वृद्धि देश के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक तेज़ी से हो रही है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य इसी क्षेत्र के केंद्र में आते हैं।”-एम. राजीवन, सह-लेखक, एट्रियायूनिवर्सिटी, बेंगलुरु

‘’हमारे अध्ययन किए गए सभी क्षेत्रों की तुलना मेंउत्तर-पश्चिम भारत में लू की गंभीरता सबसे तेज़ी से बढ़ रही है। मैदानी इलाकों में व्यापकस्तर पर की जाने वाली सिंचाई भी उन वर्षों में हीटस्ट्रैस को और बढ़ायेगी जब पानी की कमी होगी ।"-थोटा मोहन, मुख्य लेखक, नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंजवेदर फोर कास्टिंग

रिपोर्ट की सिफारिशें
पश्चिमोत्तर भारत में सबसे पहले गर्मी और शहरों की गर्मी  (अर्बन हीट) को संभालने पर ध्यान देना चाहिए। सिर्फ एक विभाग नहीं, बल्कि खेती, पानी, सेहत और सड़क – बिजली जैसे सभी क्षेत्रों को मिलकर काम करना चाहिए। निगरानी बारीक और हाई-रेज़ोल्यूशन स्तर पर होनी चाहिए, क्योंकि पूरे इलाके का औसत तापमान यह नहीं बताता कि कहाँ गर्मी सबसे ज्यादा है। शोधकर्ताओं का कहना है किय हइंडेक्स एक ऐसा औजार बन सकता है, जिसे सरकारी एजेंसियाँ हर साल चला कर पता लगा सकें कि कहाँ खतरा बढ़ रहा है।"
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