बारिश के कारण बिलावर के जाननू गांव में ध्वस्त हुआ कच्चा मकान।
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मौसम की बेरुखी ने जाननू गांव में जमकर कहर बरपाया। गांव के ज्यादातर घर जमींदोज हो गए। बचे घर भी इतने क्षतिग्रस्त हो गए कि उनमें रहना खतरा से खाली नहीं है। हर तरफ तबाही का मंजर दिख रहा है। मंगलवार को प्रशासन ने गांव के बीस परिवारों को रहने के लिए टेंट उपलब्ध करवाए।
पीड़ितों का हाल जानने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव का दौरा किया। अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन कर सरकार के पास भेजा रहा है। ताकि पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलवाया जा सके।
एसडीएम राजेश कुमार बसोत्रा, तहसीलदार विश्वजीत सिंह ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं और देखी। तसहीलदार विश्वजीत सिंह ने बताया कि भूस्खलन से गांव के पांच कच्चे मकान पूरी तरह से ढह गए हैं। जबकि अन्य मकानों को भारी क्षति हुई है। लिहाजा प्रशासन ने जिला रेड क्रास की मदद से गांव के बीस पीड़ित परिवारों को रहने के लिए टेंट उपलब्ध करवा दिए हैं।
भूस्खलन के कारण पंचायत बिलावर रूरल के वार्ड नंबर पांच जाननू गांव को भारी नुकसान पहुंचा है। कुल बीस कच्चे मकानों में से पांच पूरी तरह से ढह गए हैं। जबकि अन्य पंद्रह कच्चे मकानों को भारी क्षति पहुंची है। पक्के मकानों में भी बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। जिन लोगों के मकान पुरी तरह से ढह गए हैं, वे दूसरों के घरों में शरण लिए हुए हैं। पीड़ितों ने सरकार से उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर प्लाट देने की मांग की है।